सत्ता के गलियारों में इस तरह की सुगबुगाहट के पीछे एक कारण पुडुचेरी में बेदी का विरोध होना भी हो सकता है। हाल ही में पुडुचेरी के कई डॉक्टर और नर्स समेत स्वास्थ्य कर्मी बेदी के विरोध में उतर आए थे और उनसे माफी की मांग की थी। इसे लेकर डॉक्टर और नर्स काली पट्टी बांधकर सड़कों पर भी उतर आए थे।
दरअसल, बीते दिनों बेजी कोविड-19 के विशेष प्रकोष्ठ का निरीक्षण करने गई थीं। इस दौरान वह स्वास्थ्यकर्मियों से उलझ गई थीं। कर्मियों ने आरोप लगाया था कि बेदी ने उनसे दुर्व्यवहार किया था और धमकी भरे लहजे में बात की थी। इसके बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने प्रदर्शन करते हुए बेदी से माफी मांगने की मांग की थी।
सीएम नारायणसामी से भी खट्टे हैं किरण बेदी के संबंध
अगर केंद्र सरकार बेदी को दिल्ली बुलाने का फैसला लेती है तो इसके पीछे का एक कारण बेदी और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री नारायण सामी के संबंधों में खटास भी हो सकती है। दोनों के बीच लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे कई मौके आए हैं जब मुख्यमंत्री और बेदी ने एक दूसरे के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां भी की हैं।
वहीं, हाल ही में नारायणसामी ने बिना उप राज्यपाल की अनुमति के केंद्रशासित प्रदेश के लिए वर्ष 2020-21 का बजट पेश किया था। विधानसभा में उप राज्यपाल का पारंपरिक अभिभाषण भी नहीं हुआ था। इसे बेदी ने अवैध और अनियमित कहा था। बेदी ने कहा था कि मुख्यमंत्री जो कर रहे हैं वह पूरी तरह अवैध है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का एक खेमे का यह मानना है कि केंद्र अगर ऐसा निर्णय करता है तो इसका एक कारण दिल्ली में अपनी उपस्थिति को मजबूत करना भी हो सकता है। पहले राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना संकट को देखते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने सीधा दखल दिया और केंद्र का कहना है कि इसके बाद यहां स्थिति सुधरी है।
वहीं, अब कुशल प्रशासक के रूप में विख्यात किरण बेदी को लाकर वह अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहेगी। दिल्ली में बेदी की लोकप्रियता भी है और वह दिल्ली पुलिस में वरिष्ठ अधिकारी भी रही हैं। ऐसे में केंद्र अगर उन्हें वापस लाने का फैसला करता है तो कहीं न कहीं यह भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।