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Khabaron Ke Khiladi: जम्मू कश्मीर चुनाव के मुद्दे क्या, हरियाणा में कौन भारी? बता रहे हैं खबरों के खिलाड़ी

Sat, 24 Aug 2024 05:02 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा और जम्मू कश्मीर में चुनाव की घोषणा हो चुकी है। दोनों राज्यों में सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। राजनीतिक दलों के बीच सीटों से लेकर समझौते तक पर बात जारी है। जम्मू-कश्मीर में पहले चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के बीच गठबंधन का एलान हो चुका है। वहीं, हरियाणा में विधायकों का पार्टी बदलने का सिलसिला शुरू हो गया। इन सब मुद्दों पर इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, अवधेश कुमार, पूर्णिमा त्रिपाठी और शांतनु गुप्ता मौजूद रहे। 
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रामकृपाल सिंह: जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र उभर रहा है और करवट ले रहा है। इन चुनावों के दौरान यह देखने को मिलेगा कि लोकसभा चुनाव के दौरान जिस तरह से मतदान हुआ था, वो इस चुनाव में बढ़ेगा या नहीं। यह लोकतंत्र की जीत होगी। हरियाणा की बात करें तो अभी तक की स्थिति में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। दोनों राज्यों के नतीजे वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति के लिए भी संदेश लेकर आएंगे। 

पूर्णिमा त्रिपाठी: जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस का एक आधार रहा है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ इनका पहले भी गठबंधन हुआ था। तब यह कामयाब भी रहा था। किसकी सरकार बनेगी, यह अभी से कहना बहुत जल्दबाजी होगी। हरियाणा की बात करें तो भाजपा ने जिस तरह से किरण चौधरी को राज्यसभा भेजा है, उससे लगता है कि राज्य में भाजपा बहुत सहज स्थिति में नहीं है। कांग्रेस के लिए जरूर स्थिति थोड़ी बेहतर दिख रही है। 
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अवधेश कुमार: 370 हटने के बाद वातावरण बदला है। नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से 2000 का जो स्वायत्ता प्रस्ताव पारित हुआ, उसे लाने की बात की जा रही है। 1953 से पहले की स्थिति लागू करने की बात करके मजहबी भाव पैदा करने कोशिश की जा रही है। यह खतरनाक है। 

शांतनु गुप्ता: 370 हटते हुए हमने देखा, यह तीसरा ऐसा केंद्र शासित प्रदेश बनेगा, जहां मुख्यमंत्री होगा। अब कश्मीर में एक आम भारत के जैसा जीवन लोगों का दिख रहा है। गुलाम नबी आजाद असरदार होते हैं या नहीं, यह देखना होगा। हरियाणा की जहां बात है तो यह राज्य हरियाणा भाजपा का टिपिकल स्टेट नहीं है। 

विनोद अग्निहोत्री: सरकार और चुनाव आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती तो यह है कि जम्मू कश्मीर में शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव हो जाएं। जम्मू कश्मीर की विधानसभा एक तरह से दिल्ली जैसी विधानसभा होगी। जम्मू कश्मीर की आवाम लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेती रही है। भाजपा अगर घाटी में अपना आधार खोज रही है, उसमें कोई गलत नहीं है। राज्य बहाली का मुद्दा बाकी दल उठाएंगे। भाजपा इसका जवाब कैसे देगी, यह देखना होगा। हरियाणा में पूरा चुनाव आमने-सामने की लड़ाई का हो गया है। वहां सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच होता दिख रहा है। 

समीर चौगांवकर: मुझे लगता है कि जम्मू कश्मीर का चुनाव पूरी तरह से 370 पर केंद्रित रहेगा। चाहे इस मुद्दे के पक्ष में हो या विपक्ष में हो। जम्मू कश्मीर में जिस तरह से सीटें बढ़ी हैं और पांच सीटें मनोनीत सदस्यों की होने की वजह से भाजपा का पलड़ा भारी रहेगा। भाजपा की पहली कोशिश इतनी सीटें जीतने की होगी कि जिससे जम्मू कश्मीर में ऐसी स्थिति बने कि भाजपा के बिना कोई सरकार नहीं बन सके। हरियाणा में जिस तरह का लोकसभा चुनाव रहा था। उसे देखते हुए कांग्रेस वहां मजबूत नजर आ रही है। भाजपा ओबीसी वोट पर फोकस कर रही है। जजपा को लेकर जिस तरह से जाटों में नाराजगी है, उसके बाद जाटों का एक बड़ा वोट कांग्रेस के पक्ष में जाएगा। मुझे लगता है कि मुकाबला बहुत कड़ा होगा और पलड़ा किसी भी ओर झुक सकता है।
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