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Khabaron Ke Khiladi: कन्हैया से प्रशांत किशोर तक चर्चा में, विश्लेषकों ने बताया बिहार में चल क्या रहा है?

Sat, 12 Apr 2025 05:34 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में बिहार में जारी राजनीतिक सरगर्मियों पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, समीर चौगांवकर, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी और अवधेश कुमार मौजूद रहे। 
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खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में चुनाव की आहट के साथ राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ी हुई है। एक तरफ कांग्रेस के कन्हैया कुमार यात्रा निकाल रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर प्रशांत किशोर द्वारा उठाए जा रहे मुद्दे भी चर्चा में हैं। नीतीश कुमार को लेकर भी हर रोज नई-नई तरह की खबरें आती रहती हैं। कभी उनके बयान सुर्खियां बटोरते हैं तो कभी उन्हें डिप्टी पीएम बनाने की चर्चा चल पड़ती है। लालू और तेजस्वी यादव भी चर्चा में बने हुए हैं।
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इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में बिहार में जारी इन्हीं राजनीतिक सरगर्मियों पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, समीर चौगांवकर, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी और अवधेश कुमार मौजूद रहे। 

समीर चौगांवकर: बिहार में एक बयान ध्यान रखना होगा जो तेजस्वी यादव ने लोकसभा चुनाव के दौरान दिया था। जब उन्होंने कहा था कि ये गठबंधन सिर्फ लोकसभा चुनाव के लिए है। मुझे लगता है कि विधानसभा चुनाव में भी राजद, कांग्रेस और वाम दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे। अभी जो कुछ हो रहा है उससे कांग्रेस यह बताने की कोशिश कर रही है कि उसे बिहार में अनदेखा नहीं किया जा सकता है और जब सीटों की बात आएगी तो उसे सम्मानजनक सीटें दी जाएं। वहीं, नीतीश कुमार और भाजपा भी साथ मिलकर लड़ेंगे। पर्दे के पीछे खबर ये है कि भाजपा यह कोशिश कर रही है कि किस तरह नीतीश कुमार की जगह भाजपा का मुख्यमंत्री बनाया जाए। अभी बिहार के अंदर बहुत से समीकरण बदलेंगे। 

विनोद अग्निहोत्री: मेरी कांग्रेस के कुछ नेताओं से बात हुई है। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गठबंधन जहां होते हैं वो होते रहेंगे। लेकिन हम अपनी जड़ों की ओर लौटेंगे। कांग्रेस इस रणनीति पर उत्तर प्रदेश और बिहार में काम कर रही है। कांग्रेस अधिवेशन में यह बात आई है कि दलित और ओबीसी को जोड़ने की कोशिश होगी। ओबीसी में भी कांग्रेस ईबीसी को अपने साथ जोड़ना चाह रही है। इसी तरह दलित वोट में भी कांग्रेस रविदासी समाज को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। बिहार में कांग्रेस के अध्यक्ष भी इसी रविदासी समाज से आते हैं।

अवधेश कुमार: कांग्रेस लंबे समय से बिहार में नहीं है। उसमें अगर कोई 10-15 दिन की यात्रा निकालेगा और उससे पार्टी का रिवाइवल हो जाएगा, मुझे ऐसा नहीं लगता है। बिहार में जब तक आप लालू यादव की और यूपी में अखिलेश यादव की आलोचना नहीं करेंगे तब तक आप बिहार या उत्तर प्रदेश में बड़ी हैसियत में नहीं आ सकते हैं। बिहार में कन्हैया कुमार को लेकर लालू परिवार की सतर्कता जरूर बढ़ गई है। 

रामकृपाल सिंह: राजनीति में राजमार्ग पर चलने वाले रास्ता नहीं चुनते, रास्ता उन्हें खुद चुनता है। राहुल गांधी मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में नहीं हैं। कांग्रेस के लोग उन्हें प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं। राहुल प्रधानमंत्री तभी बन सकते हैं जब उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और महाराष्ट्र में कम से कम सौ सीटें अपने दम पर जीतते हैं। ये तभी होगा जब आप क्षेत्रीय दलों से लड़ाई लड़ेंगे। 
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पूर्णिमा त्रिपाठी: प्रशांत किशोर ने सबके साथ काम किया है। राजनीति रणनीतिकार वो बहुत अच्छे हैं इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन राजनेता कैसे है ये अभी नहीं कहा जा सकता है। हालांकि, वो मुद्दे बहुत अच्छे उठा रहे हैं। जो मुद्दे वो उठाते रहेंगे, उससे उन्हें वोट मिले या नहीं मिले, लेकिन जनता इन पर बात जरूर करने लगेगी। कांग्रेस अगर अपने को खड़ा करने की कोशिश कर रही है तो यह एक अच्छा संकेत है। जिन क्षेत्रीय दलों ने कांग्रेस को किनारे करके खुद को खड़ा किया वो राष्ट्रीय विकल्प नहीं बन सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस की ये कोशिश राजनीति के लिए अच्छी है।
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