बीते हफ्ते संभल में मस्जिद परिसर में सर्वे के दौरान हुई हिंसा का मामला सुर्खियों में रहा। यह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि अजमेर में दरगाह के अंदर सर्वे कराने की याचिका का मामला भी सामने आ गया। संभल और अजमेर में जो कुछ हो रहा है, उसी पर इस हफ्ते के खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, हर्षवर्धन त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, पूर्णिमा त्रिपाठी और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
विनोद अग्निहोत्री: 2020 में जब अयोध्या विवाद का फैसला आया, तब यह उम्मीद थी कि अब इस तरह के मामले सामने नहीं आएंगे। अयोध्या के बाद ज्ञानवापी पर सर्वे हुआ। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून इसमें आड़े नहीं आता कि किसी संरचना का पूर्व स्वरूप क्या था, यह नहीं जाना जाए। इसी के बाद मथुरा, संभल और अब अजमेर में इस तरह के मामले आए हैं। संभल में जिस तरह सब कुछ डेढ़ घंटे के अंदर हुआ, उसके बाद एक शक पैदा हुआ। इस देश में इतने मंदिर, मस्जिद, दरगाहें हैं कि आप कहां-कहां इन चीजों को खोजेंगे। फिर तो सब कुछ इसी पर अटक जाएगा। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने जो बयान दिया था कि हमें हर मस्जिद में मंदिर नहीं खोजना चाहिए, लेकिन उसके बाद भी अगर यह नहीं हो रहा है तो मुझे लगता है कि इसका दीर्घकालिक असर ठीक नहीं होगा।
समीर चौगांवकर: पूजा स्थल कानून की जस्टिस चंद्रचूड़ ने जो व्याख्या की, उसी के आधार पर लोग कोर्ट में जा रहे हैं। मुझे लगता है कि इस मामले में कोई गाइडलाइन बनानी होगी। केंद्र सरकार को इसमें दखल देना होगा। मुझे लगता है कि इस तरह की चीजें बढ़ेंगी। जहां तक संभल की बात है तो सिर्फ एक सर्वे की वजह से हिंसा नहीं हुई है।
हर्षवर्धन त्रिपाठी: कहीं भी कोई घटना होगी तो सरकार और पुलिस पर ही सवाल खड़ा करना होगा। इसमें कोई शक नहीं है। सर्वे होते-होते पत्थरबाजी शुरू हो गई। न्यायालय के फैसले का विरोध क्या पत्थर से किया जाएगा? क्या यह कहीं संविधान में लिखा है? मैं ये कह रहा हूं कि कोई ये क्यों कह सकता है कि आप अदालत नहीं जा सकते हैं?
अनुराग वर्मा: हम किस विचारधारा की बात कर रहे हैं कि इतिहास में जो गलत हुआ, उस गलत को गलत रहने देंगे, उसे सही नहीं करेंगे। या कम से कम उतना भी नहीं करेंगे कि जितना सुधार सकते हैं, उतना सुधार दें। जहां तक राजनीति की बात है तो हर राज्य में एक-दो दल ऐसे हैं जो तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं और इस तरह के मामले में आगे आ जाते हैं। मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने वालों को आत्ममंथन करने की जरूरत है।
राकेश शुक्ल: संभल में रातोंरात पत्थर कहां से आ गए। सर्वे क्यों नहीं होने दिया गया। सर्वे में क्या समस्या है। इसी देश में 750 मंदिरों का रानी अहिल्याबाई ने जीर्णोद्धार कराया था। फ्लाईओवर के ऊपर कौन दरगाह बनवाता है? मुझे लगता है कि जो भी सर्वे की बात हो रही है, वह होना चाहिए। भले उसका स्वरूप नहीं बदले, लेकिन उसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए। वहां बोर्ड लगना चाहिए कि इसका मूल स्वरूप क्या था।
पूर्णिमा त्रिपाठी: 800 साल पहले का जो भारत था, क्या उसका स्वरूप आज के जैसा था? सर्वे का मकसद क्या है? अगर आप खुदाई करना शुरू करेंगे तो क्या देश आगे बढ़ पाएगा? आज की तारीख में पूजा स्थल कानून है। उसे मानना है या नहीं मानना है, यह तय करना चाहिए। सरकार को यह तय करना होगा। दूसरा न्यायालय को भी यह सोचना पड़ेगा कि जब एक कानून है और कोई मामला उसके सामने लंबित है तो उसे इतना लंबित नहीं रखे और उस पर जल्द फैसला दे दें।