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Khabaron Ke Khiladi: आप की टूट का केजरीवाल की सियासत पर क्या असर होगा, विश्लेषकों ने बताया किधर जा रही पार्टी

Sat, 25 Apr 2026 05:06 PM IST
Sandhya Kumari न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

आम आदमी पार्टी में राज्यसभा सांसदों की टूट पर बहस में विशेषज्ञों ने भ्रष्टाचार, नेतृत्व संकट और पंजाब स्थिति को कारण बताया, भाजपा लाभ और कमजोर ढांचे की चर्चा हुई।

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खबरों के खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आम आदमी पार्टी में इस हफ्ते बड़ी टूट हुई। पार्टी के कुले 10 राज्यसभा सांसदों में से सात के भाजपा में जाने का दावा किया जा रहा है। पार्टी सांसद राघव चड्ढा ने दो अन्य सांसदों संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आप से दूर जाने का एलान किया। साथ ही चार और सांसदों के अपने साथ होने का दावा किया। आप में हुई इस बड़ी टूट पर ही इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार, पूर्णिमा त्रिपाठी, हर्षवर्धन त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, बिलाल सब्जवारी और अनुराग वर्मा मौजूद रहे। 

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अवधेश कुमार: आम आदमी पार्टी एक ऊंचे पायदान पर राजनीति करने आई। उस पार्टी की दुर्दशा पहले दिन से हुई थी। ये टूट क्रमबद्ध है। जब आपका नैतिक पायदान छोटा हो जाता है, फिर आपके प्रति सम्मान और लगाव नहीं रह जाता है। जो शराब घोटाला हुआ उस समय जो लोग छोड़कर गए उन्हें देखेंगे तो पता चलेगा भ्रष्टाचार हुआ है। जिन सात लोगों के जाने की बात है तो उनमें से छापा तो सिर्फ एक पर पड़ा है। फिर बाकी क्यों जा रहे हैं। 

हर्षवर्धन त्रिपाठी: इनमें से एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो पंजाब में भाजपा को एक भी वोट दिला पाए। जो सात लोग हैं, उनमें स्वाति मालिवाल अरविंद केजरीवाल के घर में पिटी। सात में छह नाम की बात भले अपने-अपने में होंगे। लेकिन संदीप पाठक की बात तो करनी होगी। भाजपा उन चीजों का लाभ लेने की कोशिश करेगी जो पंजाब में आम आदमी पार्टी में खत्म करने में मदद करेगा। आप का बुनियादी ढांचा टूट गया है। एक आखिरी लाइन बोलूं कि ईमानदार कट्टर नहीं हो सकता है। अभी तो उनके नए बंगले की चर्चा ज्यादा है। 

पूर्णिमा त्रिपाठी: ये सच है कि राघव चड्ढा का राजनीतिक रूप से जन्म ही आम आदमी पार्टी से हुआ है। ये सवाल ज्यादा जरूरी है कि जो हो रहा है वो क्यों हो रहा है। मैं ये सब देखकर बिल्कुल भी आश्चर्यचकित नहीं हूं। जिस तरह के लोगों को अरविंद केजरीवाल ने भेजा था वैसे लोग मौके की तलाश में हमेशा नहीं रहेंगे। पंजाब में भ्रष्टाचार और मिस गवर्नेंस बड़ा मुद्दा है। ऐसे में जो भी राजनीति में सोचेगा कि वो इस पार्टी में क्यों रहूं। लीडर वो होता है जो लोगों को साथ लेकर चलता है। अरविंद केजरीवाल को दिल्ली और पंजाब में भले जीत मिल गई, लेकिन सबको साथ लेकर चलने वाला गुण वो नहीं दिखा सके हैं। 

राकेश शुक्ल: मुझे नहीं लगता है कि आम आदमी पार्टी में और अधिक विस्तार की संभावना है। दूसरा देखने में छोटो लगे घाव करे गंभीर। राघव चड्ढा के बारे में आम आदमी पार्टी ने कभी नहीं सोचा होगा कि वो इतना गंभीर घाव करेंगे। ये तो होना ही था। जहां तक सात की संख्या से भाजपा को क्या फायदा होगा। तो जो बड़ी पार्टियां होती हैं वो प्रदर्शन में विश्वास रखती हैं। इसका मूल्यांकन वो बाद में करती हैं कि उस प्रदर्शन से कितना लाभ होगा। इस प्रदर्शन से अगर बंगाल चुनाव में थोड़ा भी वोट बढ़ा तो भाजपा को लाभ ही होगा। 

बिलाल सब्जवारी: आम आदमी पार्टी ने जो अपना नेशनल आउटलुक डेवलप किया था वो अब टूट रहा है। पंजाब में भाजपा ने इससे पहले कांग्रेस के कई बड़े चेहरों को अपने साथ जोड़ चुकी है। भाजपा पंजाब में कांग्रेस और आप के नेताओं को जोड़कर एक लॉन्ग टर्म रोड मैप तैयार कर रही है। अकाली दल से अलग होने के बाद से भाजपा पंजाब में खुद को डीप रूटेड करना चाह रही है। 

अनुराग वर्मा: अरविंद केजरीवाल की पार्टी आंदोलन से निकली पार्टी है। जिसका कोई संविधान नहीं था, कोई डूज एंड डोन्ट नहीं थे। इनका केवल एक ही संविधान है कि दूसरे सब बेईमान हैं बस हम ईमानदार हैं। आपने जो छवि बनाई थी वो बिखरती चली गई। जो आपने पिछले 15 साल से सबके साथ किया वो आज आपके साथ हुआ है तो आपको बुरा नहीं मानना चाहिए। इसका सीधा सा मतलब है कि पार्टी के अंदर हमारे अंदाजे से बहुत ज्यादा कुछ चल रहा है। ये यह भी बता रहा है कि पंजाब में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।

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