संघ प्रमुख मोहन भागवत का एक बायन इस वक्त चर्चा में है। जिसमें उन्होंने कहा कि कोई मंदिर मस्जिद का विवाद निकालकर अपनी सियायत चमकाना चाहता है तो यह गलत है। संघ प्रमुख की बात के क्या मायने हैं? संभल को लेकर जो सियासत हो रही है उसके क्या मायने हैं? ऐसे ही सवालों पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, राकेश शुक्ल, पूर्णिमा त्रिपाठी, अवधेश कुमार और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
समीर चौगांवकर: संघ प्रमुख का शुरुआत से ही यह स्टैंड रहा है। संघ को यह महसूस हुआ होगा कि अब जो हो रहा है कि उससे यह संकेत जा रहा है कि इसके पीछे संघ है। इसी को स्पष्ट करने के लिए संघ प्रमुख ने यह बात रखी है। मैं भी इस बात से सहमत हूं कि हर मस्जिद के नीचे मंदिर ढूंढने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले को कैसे लेकर जाता है? केंद्र सरकार का रुख क्या रहता है? ये सब भी देखना होगा। मोहन भागवत ने संघ की भूमिका बिलकुल स्पष्ट कर दी है।
विनोद अग्निहोत्री: संघ हिन्दुत्व की विचारधारा का सबसे बड़ा स्रोत और संगठन तो है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि यही एक मात्र संगठन है। कई ऐसे संगठन हैं जो हिदुत्व की विचारधारा के मामले में संघ की राय से सहमत नहीं रहते हैं। जहां तक उनके बयान की बात है तो यह बहुत महत्वपूर्ण बयान है और मैं इसका स्वागत करता हूं। इससे क्या एकदम से मस्जिदों में मंदिर खोजने वाले शांत हो जाएंगे। ये कहना मुश्किल है, लेकिन इसका भावनात्मक असर जरूर पड़ेगा।
राकेश शुक्ल: जहां भी जो भी राज्य सरकार है। उसे यह तय करना होगा कि जो अतिक्रमण विरोधी या बिजली चोरी जैसे मामलों में कार्रवाई हो रही है वहां शुरू से कार्रवाई हो। यानी, जब ये सब हो रहा था उस वक्त जो अधिकारी थे उन पर भी कार्रवाई हो। जहां तक हर मंदिर में मस्जिद ढूढ़ने की बात है तो संघ प्रमुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह के काम करने वालों का संघ समर्थन नहीं करेगा।
अनुराग वर्मा: विपक्ष हमेशा कहता है कि सरकार नागपुर से चलती है। अगर सरकार नागपुर से चलती होती तो संघ प्रमुख ने सुझाव नहीं दिया होता बल्कि आदेश दिया होता है। इसके साथ ही जो धर्मिक भावनाएं हैं वो मेरी व्यक्तिगत है। यह कोई और नहीं निर्धारित नहीं कर सकता है। शायद इसलिए संघ प्रमुख आदेश नहीं दिया। दूसरा हिंदू नेता बनने की जो बात कही जा रही है तो अगर इससे हिंदू नेता बनने लगे होते तो कचहरियों के बाहर लंबी-लंबी लाइने लग चुकी होतीं।
पूर्णिमा त्रिपाठी: ये जो भूत है वो 2027 तक नहीं रुकने वाला है। आगे जो चुनाव होना है उसमें संभल एक मुद्दा बनेगा। सर्वे का काम रुकने वाला नहीं है। इस तरह की खोज चलती रहेगी और नरेटिव बनता रहेगा। बिजली चोरी वाली बात नरेटिव का दूसरा पहलू है। राजनीति के हिसाब से सर्वे और बिजली चोरी का मामला देखा जा रहा है।
अवधेश कुमार: जितने धर्म शास्त्रो में वहां के मंदिरों का विवरण है वो तो होना चाहिए। इस मामले में अगर आप तथ्यों को नकारेंगे तो आप उसके साथ न्याय नहीं करेंगे। मोहन भागवत अपने भाषण में बता रहे हैं कि आप विश्वगुरु कैसे बन सकते हैं। जो लोग ये मुकदमे लेकर जा रहे हैं क्या उसको ये संभाल भी सकते हैं। कुतुबमीनार का इतिहास हम जानते हैं। जो लोग इन मुद्दों को उठा रहे हैं वो कौन लोग हैं ये देखना होगा।