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खबरों के खिलाड़ी: कैसे साधे जा रहे यूपी में चुनावी समीकरण, महिलाओं के बाद युवा वोटरों पर कैसे सबकी निगाह?

Sat, 05 Sep 2026 09:03 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
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यूपी चुनाव का विश्लेषण। - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां तेज हैं। सपा और कांग्रेस के गठबंधन से पहले दोनों ओर से अपने-अपने दावे शुरू हो गए हैं। दोनों दलों की ओर से अपने साथ नए मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश भी हो रही है। इस हफ्ते 'खबरों के खिलाड़ी' में चुनाव से पहले बन रहे इन्हीं समीकरणों पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
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अनुराग वर्मा: राहुल गांधी के साथ परेशानी ये है कि वो क्षेत्रीय सहयोगी भी चाहते हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर। पिछले चुनाव में प्रियंका गांधी ने लड़की हूं लड़ सकती हूं कैंपेन पर चुनाव लड़ीं थीं, लेकिन उनका पूरा कैंपेन विफल रहा था। वहीं, अखिलेश यादव की परेशानी ये है कि उन्हें नए वोट अपने साथ जोड़ने हैं। अखिलेश यादव के पास खोने के लिए बहुत कुछ है। बातें बहुत सी होती हैं, लेकिन आखिरी तक चीजें साफ नहीं होती हैं। हर चुनाव से पहले गठबंधन की बात होती है, लेकिन अंत तक तस्वीर साफ नहीं होती है। जैसे पिछले कुछ वक्त से महिला एक अलग वोटर वर्ग बना है वैसे ही अब जेन-जी के रूप में एक नया वोटर वर्ग तैयार होता दिख रहा है। 

पूर्णिमा त्रिपाठी: हर दल पब्लिक पोश्चरिंग करता है। वही कांग्रेस अभी कर रही है। कांग्रेस का संगठन उत्तर प्रदेश में बहुत कमजोर है, लेकिन एक तबका है जो कांग्रेस की ओर आज भी देखता है। जब उसे उम्मीद नहीं दिखती तो वो छिटककर इधर-उधर चला जाता है। आज की सामाजिक संरचना जिस तरह की है उसमें पितृसत्तात्मक सत्ता से इनकार नहीं किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस का गठबंधन होना ही है और ये तय है। इसलिए भाजपा असहज है। जहां तक युवाओं के प्रदर्शन की बात है तो जंतर-मंतर के सफल प्रदर्शन के बाद हर विपक्षी पार्टी को युवाओं में अपना संभावित वोटर वर्ग दिख रहा है। 
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विनोद अग्निहोत्री: कोई राष्ट्रीय पार्टी जब किसी भी क्षेत्रीय दल से समझौता करती है तो इस तरह का असमंजश रहता है, कि राष्ट्रीय पार्टी के अस्तित्व का क्या? कांग्रेस के लिए ये असमंजस ज्यादा है, क्योंकि जितने भी क्षेत्रीय दल हैं वो सभी कांग्रेस की जमीन लेकर ही बड़े हुए हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपना प्रदर्शन सुधारा है। 2022 में दलित वोटर भाजपा के साथ गया था। लेकिन, 2024 के लोकसभा चुनाव में ये वोटर सपा-कांग्रेस के गठबंधन के साथ गया था। जाटव वोटर जो बसपा का परंपरागत वोटर रहा है उसे अपने साथ जोड़ने की कोशिश में कांग्रेस और आजाद सामाज पार्टी दोनों लगे हैं। इसलिए कांग्रेस ने राजेंद्र पाल गौतम को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है।
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