राहुल गांधी ने हाल ही में पुणे में छात्राओं के साथ सीधे संवाद में पितृसत्ता, महिलाओं की आजादी और परिवार में बराबरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि रिश्तों से अलग भी हर महिला की अपनी पहचान है और देश की असली ताकत करोड़ों महिलाओं के सपनों और विचारों में है। इस दौरान राहुल ने मनुस्मृति का जिक्र किया। उनके इस कार्यक्रम और इसमें दिए गए वक्तव्यों को लेकर सियासी दलों में आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए। दूसरी ओर यूपी चुनाव से पहले सियासी दलों की ओर से महिलाओं को लुभाने के लिए चुनावी वादों की शुरुआत भी हुई। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इन्हीं मुद्दों पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, राकेश शुक्ल, बिलाल सब्जवारी, अनुराग वर्मा और गुंजा कपूर मौजूद रहे।
गुंजा कपूर: हमें आधी आबादी बनने में भी बहुत साल लगे हैं। एक तरफ आप कहते हैं कि हम महिलाओं को आरक्षण देना चाहते हैं, उन्हें अवसर देना चाहते हैं। दूसरी तरफ हम महिलाओं के वोट खरीदने के लिए स्कूटी, लाड़की बहन, लाडली बहन करते हैं। आप वोट बैंक को क्यों खरीदने की कोशिश कर रहे हैं? आप उनको सशक्त करने की कोशिश क्यों नहीं करते जिससे वो अपना फैसला ले सकें। हर राजनीतिक दल को लगता है कि महिला का वोट खरीद लो।
बिलाल सब्जवारी: महिलाओं की आजादी एक व्यवस्थागत समस्या है। पुरुष समाज का एक माइंडसेट रहा है कि वो महिलाओं को दबा कर रखना चाहता है। ये किसी धर्म विशेष की समस्या नहीं है। ये हर धर्म में है। राहुल गांधी ने इसे जब मनुस्मृति का जिक्र किया तो ये विवादास्पद हो गया।
राकेश शुक्ल: राहुल गांधी की मंशा पर मैं सवाल नहीं उठाता। सवाल ये है कि क्या राहुल गांधी ने मनु स्मृति पढ़ी है। उसी मनु स्मृति में ये भी कहा गया है कि महिलाएं पूजनीय हैं। मनुस्मृति 200 साल ईसापूर्व की है। उसकी हम आज चर्चा कर रहे हैं। जिस दिन राहुल गांधी अपने विवेक से काम करना शुरू करेंगे तो उस दिन उनके और कांग्रेस दोनों के लिए बेहतर होगा। आप सिलेक्टिव अप्रोच लेकर नहीं चल सकते हैं। हर धर्म में महिलाओं के लिए एक सकारात्मक और नकारात्मक दोनों बाते होती हैं।
अनुराग वर्मा: अगर ग्लास आधा भरा है तो आधा खाली भी है। सियासत में अगर आप अपने झूठ को अच्छी तरह से मार्केट कर लेते हैं तो आप सफल नेता हैं। आप किस मंच पर सवाल उठा रहे हैं और कौन से सवाल उठा रहे हैं, ये पब्लिक लाइफ में बहुत मायने रखता है। ये अंतर आपको समझना पड़ेगा।
विनोद अग्निहोत्री: लोकतांत्रिक समाज में कोई भी पार्टी अगर कोई मुद्दा उठाती है तो उसका राजनीतिक उद्देश्य होता है। कोई इससे मना नहीं कर सकता है। पितृसत्तात्मक समाज पूरी दुनिया की समस्या है। हर धर्म में इसे प्रमोट किया गया है। हर समाज में उससे खिलाफ आवाजें भी उठी हैं। हमारी ही संस्कृति में एक महिला की अग्निपरीक्षा होती है। हम सबको अपने भीतर भी झांकना चाहिए। राहुल गांधी ने जो कहा उसका सियासी उद्देश्य है या नहीं ये अलग बात है, हमें तो अपने घर से ये शुरुआत करनी होगी, महिलाओं को स्वतंत्रता देने की। इसलिए महिला उत्थान सबसे जरूरी है।