संसद के मानसून सत्र दो हफ्ते से जारी है। छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध आखिरकार इस हफ्ते टूट गया। इसके बाद लोक परीक्षा संशोधन विधेयक दोनों सदनों में चर्चा हुई। इस दौरान दोनों पक्षों ने जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। सदन के बाहर भी कई ऐसी बातें हुईं जो सुर्खियों में रहीं। इनमें निर्दलीय सांसद पप्पू यादव का स्वांग सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार पीयूष पंत, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, हर्षवर्धन त्रिपाठी और श्रीनिवास मौजूद रहे।
पीयूष पंत: बहुत दिनों बाद विपक्ष को वाइब्रेंट देखा गया। ये बिल बहुत महत्वपूर्ण था। जिस तरह के सेंटीमेंट बन रहे हैं उसके लिहाज से ये बिल बहुत अहम था। पीएम ने ये भी कहा कि हम सभी को माफ करते हैं। इस बार का आधा मानसून सत्र ये कहा जा सकता है कि इस दौरान विपक्ष हावी रहा।
हर्षवर्धन त्रिपाठी: 2024 वाले कानून को और बेहतर करके पारित हुआ है। ये कहा जा सकता है कि सरकारें छात्रों की परीक्षा सही से कराने में विपल रही हैं। धर्मेंद्र प्रधान अगर पेपर लीक के बाद जब री नीट हुआ उसके बाद अपने इस्तीफे वाली बात लिखते थे लोग ज्यादा कनेक्ट करते। पहली बार जंतर-मंतर हजारों अपराधियों का समूह नजर आया। पहली बार पुलिसवालों को लिंच करने की कोशिश की गई। पहली बार पुलिसवाले छात्रों के साथ बदसलूकी करते नजर आए। कुल मिलाकर दोनों पक्षों की ओर एक्सट्रीम नजर आया।
पूर्णिमा त्रिपाठी: इतनी बड़ी घटना दिल्ली में हुई। पूरा हफ्ता निकल गया, लेकिन क्या ये गृह मंत्री की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वो सदन में आकर इसका जवाब दें। पीएम रील बनाकर छात्रों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन क्या उनको सदन में नहीं बोलना चाहिए। ऐसे तो सदन का क्या महत्व रह गया। क्या सिर्फ बिल पास कराने तक ही सदन का काम रह गया है। ऐसा लोकतंत्र में नहीं होना चाहिए। संसद देश के साथ संवाद करने का भी जरिया होता है, वो संवाद हमें नहीं दिखाई दिया।
राकेश शुक्ल: प्रधानमंत्री को जिससे संवाद करना था, उन्होंने उससे संवाद करने के लिए वही प्लेटफॉर्म चुना जो जेन जी इस्तेमाल करता है। इसके लिए उन्होंने वो समय चुना जिस समय जेन जी सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा एक्टिव रहता है। मकर द्वार के सामने पप्पू यादव ने जो स्वांग किया उसके चलते अब विपक्ष सवालों के घेरे में है।
श्रीनिवास: पप्पू यादव ने एक ढ़ोंगी का स्वांग किया। संत चोरी नहीं करता, साधु चोरी नहीं करता। पप्पू यादव जो स्वांग कर रहे थे उससे वे यह दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि संत वेश में ढ़ोंगी भी हो सकता है। जहां तक पेपर लीक बिल के प्रावधान हैं तो उस बिल में ये कहीं नहीं है कि पेपर लीक कैसे रुकेगा। उसमें पेपर लीक के बाद क्या होगा उसके प्रावधान हैं।