विनोद अग्निहोत्री: ऑपरेशन सिंदूर आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए किया गया था। पीओके इसके एजेंडे में ही नहीं था। ये अलग बात है कि पीओके को लेकर इतनी ज्यादा रट लगाई गई है कि इसलिए लोगों के मन में था कि चलो लड़ाई हो गई है तो पीओके भी आ जाए। लेकिन, सरकार के इस ऑपरेशन में ऐसा कोई लक्ष्य नहीं था। देश के बाहर हम सब एक हैं। देश के अंदर हम फिर राजनीति करेंगे। शशि थरूर और सलमान खुर्शीद वही कह रहे हैं जो देश के बाहर कहना चाहिए। उसी तरह पवन खेड़ा वही कह रहे हैं जो देश के अंदर एक राजनीतिक दल को करना चाहिए।
समीर चौगांवकर: जिस तरह से केंद्र सरकार ने पूरी दुनिया में प्रतिनिधिमंडल भेजा है और उसे लेकर जिस तरह देश में बयान आ रहे हैं, जैसे जयराम रमेश का बयान, इस तरह के बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। यह आपसी एकता को कमजोर करने वाला बयान है। विपक्ष को इससे बचना चाहिए था। पवन खेड़ा अगर ये बात कह रहे हैं कि भाजपा के पास कोई मुस्लिम सांसद नहीं है तो यह कोई नई बात तो नहीं है। कांग्रेस को शशि थरूर के बयानों को, जो विदेश में देश की बात रख रहे हैं, उन पर टिप्पणी से बचना चाहिए था। पीओके की जहां तक बात है तो भारत की यह कभी मंशा नहीं थी कि ऑपरेशन सिंदूर के वक्त पीओके को हम ले लेंगे। वैसे भी लड़कर कोई चीज हथियाने से बेहतर है कि वो टूटकर आपके साथ आए।