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खबरों के खिलाड़ी: जनगणना की प्रश्नावली पर क्यों मचा बवाल? विश्लेषकों ने बताया जाति पर किसकी कैसी सियासत

Sat, 29 Aug 2026 05:06 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जातिगत जनगणना पर सियासत। - फोटो : अमर उजाला
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कांग्रेस ने जातिगत जनगणना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पार्टी ने सरकार से मौजूदा प्रश्नावली को रद्द कर राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम जनता से परामर्श के बाद नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग की है। इसके साथ ही जातिगत जनगणना के तौर-तरीकों को लेकर सियासत शुरू हो गई है। ओबीसी की वास्तविक संख्या सामने नहीं आने की आशंका जताते हुए विपक्षी दल इसे तूल देने में लगे हैं। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, राकेश शुक्ल, बिलाल सब्जवारी, अनुराग वर्मा और गुंजा कपूर मौजूद रहे।
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अनुराग वर्मा: मेरा मानना है कि जब हम जातिविहीन व्यवस्था की बात कर रहे हैं, उस वक्त क्या आप देश को 200 साल पीछे ले जाना चाहते हैं। हम मित्रता करते समय जाति के बारे में नहीं सोचते, आज कल इंटरकास्ट शादियां भी बढ़ रही हैं। इन सबके बीच इस तरह की बातें करना मंशा पर सवाल खड़ा करता है। 

राकेश शुक्ल: आप खुद से यह तय नहीं कर सकते हैं कि आप आर्थिक सामाजिक रूप से पिछड़े हुए हैं या नहीं। ये सरकार तय करेगी। आजादी के बाद जातियों की संख्या लगातार बढ़ी है। ये विसंगति के कारण है। आने वाली जनगणना त्रुटिपूर्ण नहीं होगी इसकी क्या गारंटी है?

गुंजा कपूर: आजादी के करीब 80 साल होने को हैं। राहुल गांधी जिस तरह से जाति के ऊपर इतना फोकस कर रहे हैं। क्या आप एक बार फिर समाज को बांटना चाहते हैं। जातीय जनगणना का एक मुख्य मोटिव आरक्षण ही है। हमें व्यवस्था में सुधार करना होगा। जनगणना में दिक्कत नहीं है, दिक्कत व्यवस्था में है। 

बिलाल सब्जवारी: इस सबका जन्म समाज के अंदर मौजूद असमानता से होता है। समाजिक असमानता से समाजिक न्याय की मांग ने जन्म लिया। यहीं से आरक्षण की बात आती है। जब तक समाज का डेटा नहीं होगा तब तक आप संसाधनों का बंटवारा नहीं कर सकते हैं। राजनीति का जहां तक सवाल है तो सरकार ने इसका वादा किया था।  
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विनोद अग्निहोत्री: जाति भारतीय समाज का कटु सत्य है। हम पसंद करें या नहीं कर पर ये सच्चाई है। मंडल आयोग के बाद में ये विभाजन सामाजिक और राजनीतिक तौर पर और मजबूत हुआ है। पहले जो पिछड़ा समाज की एक छतरी हुआ करती थी उसकी अलग-अलग जातियों की अब पार्टियां बन गई हैं। जाति जनगणना का उद्देश्य जातियों की पहचान करना है। जब जाति की पहचान हो जाएगी तब असल तस्वीर सामने आएगी। तब आपकी सामाजिक कल्याण की योजनाएं उस हिसाब से बन सकेंगी।
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