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Khabaron Ke Khiladi: बिहार में मतदाता जांच से चुनाव बहिष्कार तक के पीछे की क्या सियासत? बता रहे हैं विश्लेषक

Sat, 26 Jul 2025 05:03 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग मतदाताओं की पहचान स्थापित करने के लिए वोटर लिस्ट का 'विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम चला रहा है। इसे लेकर बिहार में विपक्षी दल कांग्रेस-राजद ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। ईसी के इस कदम की चर्चा बिहार विधानसभा से लेकर संसद तक हो रही है। 
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण पर जमकर सियासत हो रही है। बिहार विधानसभा के आखिरी सत्र में भी इसे लेकर जमकर हंगामा हो रहा है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तो आने वाले चुनाव के बहिष्कार तक की धमकी दे दी है। इस हफ्ते 'खबरों के खिलाड़ी' में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार, राकेश शुक्ल, पूर्णिमा त्रिपाठी, राजकिशोर और पीयूष पंत मौजूद रहे। 
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राकेश शुक्ल: बनी हुई जमीन खिसके नहीं और नई जमीन तैयार हो जाए। सारे सियासी दल इसी की कवायद कर रहे हैं। सबसे मूल प्रश्न ये है कि अगर आप कह रहे हैं कि बांग्लादेशी घुसपैठिए और रोहिंग्या सरकार के लाए हैं तो विपक्ष को इस पर सहमत होना चाहिए कि इनका नाम मतदाता सूची से कट जाए। उस पर हाय तौबा क्यों मची है। बिहार में जब भी चुनाव आता है तो नीतीश कुमार हर बार लालू यादव और राबड़ी देवी के कार्यकाल के पन्ने को उलटते हैं। चुनाव से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच में एक घेराबंदी की कोशिश हो रही है। 

पूर्णिमा त्रिपाठी: SIR का मुद्दा बिहार से निकलकर देश का बन चुका है। चंद्रबाबू नायडू चुनाव आयोग से मिलकर आए हैं। स्टालिन भी इस मुद्दे को उठा रहे हैं। सवाल ये है कि जिस मतदाता सूची को आपने जनवरी में अंतिम रूप दिया था उसी को SIR करके आप कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। जिस आधार कार्ड को आप हर चीज का आधार बताते हैं उसे नहीं शामिल करना बिना सिर-पैर की बात लगती है। अगर पिछली मतदाता सूची गलत थी तो फिर तो 2024 का लोकसभा चुनाव भी गलत था। इसी वजह से बिहार की विधानसभा से लेकर संसद तक में हंगामा हो रहा है। 

राजकिशोर: चुनाव एक सतत प्रक्रिया है। उसमें मतदाता पुनरीक्षण भी समय-समय पर होता रहता है। विपक्ष को अगर लग रहा है कि इससे उनका अहित हो रहा है तो वो सवाल उठाएगा। यहां यह ध्यान रखना पड़ेगा कि हम भारत के लोग हैं और मतदान का अधिकार भी सिर्फ यहां के लोगों को है। जीवनभर आप गलत काम करते रहे और अगर उस गलती को अब सुधारने का प्रयास किया जा रहा है तो उस पर क्या आपत्ति उठाई जाएगी। वोटर कार्ड और आधार को जोड़ देना चाहिए, इससे बहुत सी विसंगतियां दूर हो जाएंगी। 
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पीयूष पंत: प्रक्रिया सही है। लेकिन चुनाव आयोग किसी की नागरिकता तय नहीं कर सकता है। बिहार में बहुत सी आबादी दूसरे राज्यों में जाकर काम करती है। बहुत से लोग जो मर चुके हैं, उनके नाम भी मतदाता सूची में थे। उनके फॉर्म फिर से अपलोड करने की खबरें भी आ रही हैं। यह लंबी प्रक्रिया है। इसमें आपको घर-घर जाकर डाटा लेना होता है। इस बार सबकुछ जल्दी में हो रहा है। इसलिए सवाल उठ रहे हैं। चुनाव के समय पर रोहिंग्या का मुद्दा बनाया जाता है। 

अवधेश कुमार: अगर केवल भ्रम और झूठ फैलाकर चुनाव जीते जा सकते हैं तो ये सही है। हर पार्टी बूथ लेवल पर एजेंट के जरिए अपने वोटर को जोड़ने का पूरा प्रयास कर रही है। वोटर का जो रिवीजन चल रहा है उस पर सवाल है। पहली बार है जब केंद्र की मुख्य विपक्षी पार्टी और राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी इस पर सवाल उठा रही हैं। दूसरा अभी तक कोई बहुत बड़ी गड़बड़ी करने की बात सामने नहीं आई है। तीसरा घुसपैठ की जहां तक बात है तो देश में 1980 के दशक से बांग्लादेश से घुसपैठ हो रही है।
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