फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Khabaron Ke Khiladi: बिहार में कैसे बनेंगे गठबंधन, किसका समीकरण होगा भारी? बता रहे हैं ‘खबरों के खिलाड़ी’

Sat, 05 Jul 2025 05:01 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

बिहार में विधानसभा चुनाव का एलान कुछ दिनों में होने वाला है। इसे लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। हालांकि, अभी बिहार में गठबंधनों को लेकर स्थिति साफ नहीं है। जहां जदयू-भाजपा और राजद-कांग्रेस के साथ आने की संभावना सबसे ज्यादा हैं, तो वहीं जीत और हार में अंतर बनाने वाले कई छोटे दलों पर असमंजस की स्थिति है। 
विज्ञापन
खबरों के खिलाड़ी में बिहार चुनाव पर चर्चा। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी उठापटक जारी है। सियासी दलों में बयानबाजी का दौर जोर पकड़ रहा है। कोई चिट्ठी लिखकर गठबंधन के साथ आने को बेताब दिख रहा है तो कोई गठबंधन के अंदर अपने को समुदाय विशेष का सबसे बड़े नेता बता रहा है। गठबंधन कैसे बनेंगे? सीटों का बंटवारा कैसा होगा? कौन किसका वोट काटेगा? इन सभी सवालों पर इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ कार्यक्रम में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, विजय त्रिवेदी, राकेश शुक्ल और अवधेश कुमार मौजूद रहे।  
विज्ञापन




विजय त्रिवेदी: एनडीए के लिए बड़ा डेंट नहीं होने वाला है। एनडीए के की चिंता यह होगी कि एमवाई वोट से इतर जो वोटर है वो विपक्ष की ओर नहीं जाए। उनकी चिंता दलित वोटर है। उनकी चिंता यह नहीं है कि मुस्लिम वोट से कितना नुकसान होने वाला है। हनुमान किसकी लंका में आग लगा सकते हैं उनका फोकस इस पर होगा पिछली बार उन्होंने नीतीश की लंका में आग लगाई थी। चिराग पासवान और जीतनराम मांझी उस वोटर को अपने साथ कर सकते हैं। महागठबंधन की चिंता ये होगी कि क्या असद्दुद्दीन ओवैसी मुकाबले में हैं या नहीं। 

रामकृपाल सिंह: अभी तक पिक्चर साफ नहीं है। एक बात तय है कि एनडीए और इंडिया गठबंधन की बात करेंगे तो एनडीए में उतने धड़े नहीं हैं। सवाल ये है कि कांग्रेस और आरजेडी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगे। सीटों का बंटवारा कैसे होगा। या दोनों अलग हो जाएंगे। ओवैसी ने भी चिट्ठी लिखी है। केजरीवाल भी वहां चुनाव लड़ने जा रहे हैं। कांग्रेस को आप खारिज नहीं कर सकते हैं।

विनोद अग्निहोत्री: लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का स्टाइक रेट राजद से बेहतर था। उत्तर प्रदेश में जो नतीजे आए। कांग्रेस की तरफ अल्पसंख्यक वोटर आकर्षित हो रहा है। दूसरा दलित वोटर भी उसकी ओर देख रहे हैं। बिहार में पासवान वोटर चिराग पासवान के साथ है।  मुसहर वोट का बड़ा हिस्सा जीतन राम मांझी के साथ है। इन दोनों से इतर जो वोटर है वो पहले बसपा के साथ था अब उसकी स्थिति ठीक नहीं है। प्रशांत किशोर कहां किसका वोट काटेंगे वो भी देखना होगा। 
विज्ञापन

राकेश शुक्ल: उत्तर प्रदेश में राहुल और अखिलेश तो थे। लेकिन बिहार में कांग्रेस ने दूसरा लड़का भेज दिया है। वो कन्हैया कुमार हैं। जो राजद को हजम नहीं हो रहे हैं। बिहार में जो खींचतान चल रही है वो तब स्पष्ट होगी, जब दोनों गठबंधनों की तस्वीर साफ होगी। इससे पहले कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। 

अवधेश कुमार: 2015 में सीमांचल से महागठबंधन की 15 सीटें आईं थीं। वहीं, 2020 में ये घटकर सात सीटें रह गईं। पांच सीटें ओवैसी की पार्टी के खाते में गईं। इसके साथ ही उन्होंने महागठबंधन को बड़ा नुकसान पहुंचाया। 2020 में जदयू को मुस्लिम वोट मिले ही नहीं थे। दूसरा राजद और कांग्रेस साथ होते हुए भी आपस में मुस्लिम वोट के लिए लड़ाई है। तेजस्वी यादव का बयान आग लगाऊ भाषण था। केंद्र के कानून को चुनाव जीतने लिए इस तरह का बयान देना गलत है।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें