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Khabaron Ke Khiladi: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मायने, विशेषज्ञों ने बताया ये डील हमारी कितनी बड़ी जीत?

Sat, 07 Feb 2026 05:10 PM IST
संध्या न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील में अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत के टैरिफ को हटाकर 18 प्रतिशत के साथ नए स्तर से व्यापार शुरु किया है। 

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खबरों के खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इस हफ्ते जिन खबरों की चर्चा रही उसमें हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुआ अंतरिम व्यापार समझौता शामिल है। इसने देश के राजनीतिक और आर्थिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'मैक्सिमम प्रेशर' नीति के बीच भारत पर 18% का नया टैरिफ लागू किया गया है, जबकि एशिया के अन्य देशों पर यह कहीं अधिक है। विपक्ष ने इस डील की पारदर्शिता और किसानों के हितों को लेकर सवाल उठा रहा है। वहीं, सरकार इसे एक बड़ी कूटनीतिक जीत बता रही है। अमर उजाला के खास शो 'खबरों के खिलाड़ी' में आज इसी डील के हर पहलू चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार राम कृपाल सिंह, राकेश शुक्ल, पीयूष पंत, अनुराग वर्मा और बिलाल जवारी  मौजूद रहे।

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राकेश शुक्ल: यह डील रातों-रात नहीं हुई है, बल्कि चार महीने की लंबी बातचीत का परिणाम है। नए सिरे से जब डील तैयार होती है तो उसका फ्रेमवर्क भी नए सिरे से होता है। तो भारत सरकार की उन आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए सारा एक फॉर्मेट तैयार किया गया। पीयूष गोयल जी हो गए, जयशंकर जी हो गए वो अमेरिका के साथ लगातार संपर्क में थे और अब वो फाइनल फ्रेमवर्क तैयार हुआ। फाइनल फ्रेमवर्क तैयार होने के बाद वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की तरफ से स्टेटमेंट आया। जो चीजें सामने की गई उसमें यह स्पष्ट किया गया है कि भारत के किसानों के हित के साथ कोई समझौता नहीं हुआ। 

सबसे बड़ी आपत्ति डेयरी उत्पादों को लेकर थी, जिनसे हमारी धार्मिक भावनाएं जुड़ी हैं, और नए समझौते में इन चीजों को स्पष्ट रूप से अलग रखा गया है। हमें डोनाल्ड ट्रंप के विरोधाभासी बयानों के बजाय भारत सरकार के आधिकारिक बयान पर भरोसा करना चाहिए, क्योंकि ट्रंप अक्सर ऐसे दावे करते हैं जिन पर वे खुद खरे नहीं उतरते।  

राम कृपाल सिंह: प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि कृषि और डेयरी सेक्टर के हितों पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। अब तक जो देखा है और सुना तो करीब-करीब चीजें वही हैं जो कही गई थीं। आने वाले 5 वर्षों के लिए है और इसमें 'प्रयास करने' की बात कही गई है, न कि कोई अनिवार्य बाध्यता। कोई भी ऐसी चीज नहीं है जो भारत का किसान मूल रूप से पैदा करता है और वह चीज हम अमेरिका से मंगाएंगे ऐसा कहीं नहीं है। हम केवल उन्हीं चीजों का आयात करेंगे जो हम खुद पैदा नहीं करते, जैसे अमेरिकी पिस्ता, बादाम या अखरोट, जो पहले भी द्विपक्षीय व्यापार का हिस्सा रहे हैं। गेहूं, चावल और मक्का जैसी फसलों पर, जिनमें भारत आत्मनिर्भर है, कोई समझौता नहीं किया गया है। विपक्ष को केवल अवधारणाओं के आधार पर हमलावर होने के बजाय अंतिम बारीकियों का इंतजार करना चाहिए।

पीयूष पंत: अमेरिका की अर्थव्यवस्था बुरे दौर से गुजर रही है और ट्रंप दूसरी अर्थव्यवस्थाओं से 'उगाही' करने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें लगातार अमेरिकन दबाव तो है, इसमें कोई दो राय नहीं है। क्योंकि अमेरिका की अर्थव्यवस्था बहुत ही बुरे हालात में है। इसलिए ट्रंप को लग रहा है कि वे हाथ उमेठ के दूसरे देशों की अर्थव्यवस्थाओं से उगाही कर लें। भले ही सरकार इसे राजनीतिक जीत के रूप में पेश कर रही है, लेकिन इसकी बारीकियों को समझना जरूरी है।  सरकार को किसानों के हितों की रक्षा के लिए और अधिक सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि आयातित अनाज स्थानीय उत्पादन और इथेनॉल उद्योग को प्रभावित कर सकता है।

बिलाल सब्जवारी: जो एक भ्रम पैदा हुआ वो वाइट हाउस की जो प्रवक्ता थीं उनके बयान से पैदा हुआ। फिर उनके जो एग्रीकल्चर मिनिस्टर थे रोलिंस बुक्स एल उन्होंने जो ट्वीट किया और इस डील के बारे में राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी। दरअसल जो बिंदु हमें सामने आए हैं, डिटेल्स तो नहीं आई हैं। उन बिंदुओं के आधार पर इसका एक क्रिटिकल रिव्य्यू तो बनता ही है।

वैश्विक राजनीति में भारत के पास अमेरिका को छोड़ने के बहुत अधिक विकल्प नहीं थे। हम इसे डिफेंसिव विक्ट्री के रूप में देख सकते हैं। भले हम इसे विक्ट्री ना कहें कि हम एक रक्षात्मक दृष्टिकोण से हमने इस डील को किया है।  

अनुराग वर्मा: चाहे यह सरकार हो चाहे इसके पहले की सरकारें हों। भारत देश कभी किसी के सामने न कमजोर था न है न रहेगा।  यह बात बहुत अच्छे से प्रत्येक देशवासी को समझने वाली है कि ट्रेड डील में कोई ऐसी चीज हमें सपने में भी आज भी सोचने की जरूरत नहीं है कि जो देश के हित में नहीं होगा वो एक्सेप्ट किया जाएगा। 

डोनाल्ड ट्रंप एक शुद्ध व्यापारी हैं और शुद्ध व्यापारी जिस तरह से चीजों को देखता है वैसे ही वह देखते हैं। ट्रंप की 'आर्म ट्विस्टिंग' नीति के सामने भारत मजबूती से खड़ा रहा है। टेक्सटाइल, लेदर और ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों में भारत को बांग्लादेश, वियतनाम और पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त मिलेगी, क्योंकि उन पर भारत की तुलना में अधिक टैरिफ लगाया गया है।

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