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KG Basin Gas Case: रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- नहीं की गैस चोरी, प्राकृतिक दबाव से हुआ प्रवाह

Thu, 21 May 2026 10:10 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और उसकी विदेशी साझेदार कंपनियों ने केजी बेसिन गैस विवाद मामले में केंद्र सरकार के आरोपों को सुप्रीम कोर्ट में पूरी तरह खारिज कर दिया। कंपनियों ने कहा कि उन्होंने ओएनजीसी के क्षेत्र से गैस की चोरी नहीं की, बल्कि प्राकृतिक दबाव के कारण गैस अपने आप उनके ब्लॉक में आ गई। क्या है पूरा मामला, पढ़िए रिपोर्ट-
 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और उसकी विदेशी साझेदार कंपनियों ने कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन गैस विवाद मामले में केंद्र सरकार के आरोपों को सुप्रीम कोर्ट में सिरे से खारिज किया। इन कंपनियों ने कहा कि उन्होंने ओएनजीसी के क्षेत्र से गैस नहीं चुराई, बल्कि प्राकृतिक दबाव के कारण गैस का प्रवाह उनके ब्लॉक में हुआ था।
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सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ रिलायंस, बीपी एक्सप्लोरेशन (अल्फा) लिमिटेड और नीको लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका मेंदिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने फरवरी 2025 में कंपनियों के पक्ष में आए मध्यस्थता (अरबिट्रेशन) फैसले को रद्द कर दिया था। 

केंद्र सरकार ने आरोप लगाया था कि रिलायंस-बीपी-नीको समूह ने बंगाल की खाड़ी के केजी-डी6 ब्लॉक में ओएनजीसी के क्षेत्र से आई गैस का इस्तेमाल किया और उससे उत्पादन किया। इसी कारण पेट्रोलियम मंत्रालय ने नवंबर 2016 में इस समूह पर 1.47 अरब अमेरिकी डॉलर का जुर्माना लगाया था।
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रिलायंस की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि प्राकृतिक गैस दबाव के अंतर के कारण एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में प्रवाहित हो सकती है। इसे जानबूझकर चोरी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि ओएनजीसी कई वर्षों तक गैस उत्पादन शुरू नहीं कर सका, ऐसे में रिलायंस पर गैस प्रवाह कराने का आरोप नहीं लगाया जा सकता। 

पीठ ने कहा कि गैस का प्रवाह जानबूझकर नहीं कराया जा सकता और यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया हो सकती है। सिंघवी ने यह भी कहा कि यदि यह मान भी लिया जाए कि रिलायंस ने ओएनजीसी की गैस निकाली, तब भी इसकी मात्रा का सही आकलन कैसे किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्पादन साझेदारी अनुबंध (पीएससी) के तहत कंपनियां अपने लाइसेंस प्राप्त क्षेत्र के भीतर ही काम कर रही थीं।

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गैस चोरी का आरोप ही गलत: सिब्बल
एक विदेशी साझेदार कंपनी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भी केंद्र के आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि गैस चोरी का पूरा आरोप ही गलत है। यदि स्थिति विपरीत होती और ओएनजीसी पहले उत्पादन शुरू कर देता, तो क्या सरकार ओएनजीसी से रिलायंस को मुआवजा दिलाती? 
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सिब्बल ने यह भी कहा कि सरकार ने आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कुछ क्षेत्रों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दी थी और ऐसे मामलों में मध्यस्थता फैसलों में अत्यधिक हस्तक्षेप विदेशी निवेशकों के भरोसे को प्रभावित करेगा।सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई शुक्रवार को भी जारी रहेगी।
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