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केतन मर्डर केस: भाई का दावा-आशुतोष को काम पर नहीं रखा, वकीलों के फेर में उलझी सिया; असली काउंसिल कौन?

Mon, 29 Jun 2026 03:56 PM IST
राकेश कुमार एएनआई, पुणे।

सार

केतन अग्रवाल हत्याकांड में वकीलों की पैरवी को लेकर नया सस्पेंस खड़ा हो गया है। सिया के भाई ने वकील आशुतोष श्रीवास्तव के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अब अधिवक्ता विपुल दुशिंग आधिकारिक तौर पर सिया का केस संभाल रहे हैं। क्या आज कोर्ट में वकीलों का यह नया एंगल सिया को पुलिस कस्टडी से राहत दिला पाएगा या निकम की दलीलें भारी पड़ेंगी?

 

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केतन हत्याकांड - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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क्या केतन अग्रवाल की मौत के पीछे कानूनी पैंतरेबाजी का कोई नया खेल शुरू हो गया है? लोनावला के लोहागढ़ किले में 18 जून को हुए इस खौफनाक मर्डर केस में अब वकीलों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मुख्य आरोपी 20 वर्षीय सिया गोयल की कानूनी पैरवी कौन कर रहा है, इसे लेकर परिवार और वकीलों के बीच विरोधाभास सामने आया है।
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सिया के भाई साहिल ने मीडिया के सामने आकर एक चौंकाने वाला दावा किया है। साहिल ने साफ कहा है कि उनके परिवार ने एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव को कभी काम पर नहीं रखा है। साहिल का कहना है कि वे नहीं जानते कि आशुतोष श्रीवास्तव किस आधार पर सिया की तरफ से दावे कर रहे हैं। इस बयान के बाद कोर्ट रूम से लेकर पुलिस महकमे तक हलचल तेज हो गई है।

अधिवक्ता विपुल दुशिंग की क्या है रणनीति?
इस पूरे विवाद के बीच अधिवक्ता विपुल दुशिंग ने स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर बयान दिया है कि उनकी टीम इस केस में सिया का प्रतिनिधित्व कर रही है। दुशिंग ने कहा कि यह मामला अभी बेहद शुरुआती चरण में है, इसलिए अभी से किसी बड़े नतीजे की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि उनकी टीम अदालत के सामने मजबूती से अपनी दलीलें रखेगी। उनका मुख्य लक्ष्य फिलहाल सिया के लिए कम से कम पुलिस कस्टडी रिमांड सुनिश्चित करना या उसे न्यायिक हिरासत में भेजने की कोशिश करना होगा। सात दिनों की शुरुआती पुलिस कस्टडी आज (29 जून) खत्म हो रही है, जिससे आज की अदालती कार्रवाई बेहद अहम हो गई है।
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क्या है पूरा मामला और अब तक की पांच बड़ी बातें?
एक्सीडेंट से मर्डर की थ्योरी:
18 जून को केतन की मौत को ट्रैकिंग के दौरान पैर फिसलने का हादसा बताया गया था, जो बाद में गहरी साजिश निकली।

इशारे पर 400 फीट नीचे धक्का: पुलिस के अनुसार, सिया ने पहले से तय प्लान के तहत जूते का फीता बांधने का नाटक किया। यह इशारा मिलते ही चेतन चौधरी ने केतन को 400 फीट गहरी खाई में धकेल दिया।

लोकेशन छिपाने की नाकाम कोशिश: आरोपी चेतन ने अपनी लोकेशन छिपाने के लिए दूसरे कर्मचारी का फोन इस्तेमाल किया और 640 मिनट तक ऑफलाइन रहा।

वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम की एंट्री: राज्य सरकार ने इस हाई-प्रोफाइल मामले के लिए दिग्गज वकील उज्ज्वल निकम को नियुक्त किया है।

क्राइम सीन का रीक्रिएशन: पुणे ग्रामीण पुलिस ने रविवार को ही दोनों आरोपियों को लोहागढ़ किले पर ले जाकर एक डमी की मदद से पूरे घटनाक्रम को रीक्रिएट किया था।

सगाई से लेकर साजिश तक की कहानी
केतन अग्रवाल और मुख्य आरोपी सिया गोयल की हाल ही में सगाई हुई थी। केतन इस रिश्ते से बेहद खुश था और सिया के साथ अपनी नई जिंदगी के सपने देख रहा था। उसे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि जिसे वह हमसफर मान रहा है, वही उसकी मौत की स्क्रिप्ट लिख रही है। दावा किया जा रहा है कि सिया असल में चेतन चौधरी के साथ रिश्ते में थी और केतन को रास्ते से हटाना चाहती थी। इसी वजह से उसने केतन को ट्रैकिंग के बहाने लोनावला के लोहागढ़ किले पर चलने के लिए राजी किया, ताकि वह इसे एक हादसा दिखा सके।
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कैसे आरोपियों तक पहुंची पुलिस? 
इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने कई दिनों तक प्लानिंग की थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि वारदात से पहले और बाद में आरोपियों ने सबूत मिटाने की पूरी कोशिश की। खाई में धकेलने के बाद केतन का मोबाइल फोन भी गायब कर दिया गया था ताकि पुलिस को कोई लोकेशन डेटा न मिले। हालांकि, पुलिस ने साइंटिफिक इनवेस्टिगेशन और मोबाइल टावर डंप डेटा की मदद से दोनों के झूठ को पकड़ लिया। पुलिस के पास दोनों के खिलाफ पुख्ता डिजिटल और फॉरेंसिक सबूत हैं, जो कोर्ट में इन्हें कड़ी सजा दिलाने के लिए सबसे बड़े हथियार बनेंगे।
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