पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना को लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बयान पर राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक शुरू होने से पहले भाजपा ने सफाई देकर मामले का पटाक्षेप करने की कोशिश की। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने रविवार दोपहर 12 बजे हाईकोर्ट पहुंचकर राष्ट्रीय अध्यक्ष के बयान पर कहा कि शाह ने बेंच को लेकर कोई बयान नहीं दिया है।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव की मौजूदगी में मौर्य ने वकीलों से साफ कहा, बेंच को लेेकर मीडिया में जो कुछ भी छापा गया है, वह गलत है। प्रदेश अध्यक्ष की ओर से इस सफाई के बाद हाईकोर्ट बार ने इस मुद्दे पर अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है। मालूम हो कि बीते दिनों आगरा के कई अधिवक्ताओं से नई दिल्ली में मुलाकात के दौरान अमित शाह ने हाईकोर्ट की बेंच को लेकर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया था। इससे संबंधित समाचार मीडिया में आने के बाद हाईकोर्ट के वकील आक्रोशित हो गए। बयान के विरोध में उन्होंने भाजपा राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक विफल करने तक की चेतावनी दे डाली।
अधिवक्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष से बयान पर स्पष्टीकरण भी मांगा। शनिवार को भी कुछ वकीलों ने मौर्य का घेराव किया था। रविवार को केशव मौर्य खुद हाईकोर्ट पहुंचे और वकीलों के सामने साफ तौर पर कहा, अमित शाह ने किसी से भी ऐसा कुछ नहीं कहा है, जैसा मीडिया में छपा है। स्पष्टीकरण का स्वागत करते हुए बार के अध्यक्ष राधाकांत ओझा और महासचिव अशोक कुमार सिंह ने कहा, उन्हें पहले से भी इस बात का भरोसा था कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला है।
दोनों ओर बंट रही आश्वासन की रेवड़ी
हाईकोर्ट की बेंच पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बनाने का मुद्दा दशकों से सियासी दलों के लिए एक राजनीतिक मुद्दा भर है। पार्टियां इसका इस्तेमाल महज क्षेत्रीय संतुलन साध कर वोट बैंक पक्का करने के लिए ही करती रही हैं। शायद यही वजह है कि पिछले 50 वर्षों से बेंच का मुद्दा जहां के तहां है और पार्टियां मौका और सुविधा देखकर बेंच के गठन और विरोध में बयान देती रही हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बयान को भी कुछ इसी नजरिए से देखा जा रहा है। पश्चिम के वकीलों से मुलाकात में संभवत: उन्होंने बेंच के समर्थन में बयान दे दिया, क्योंकि वोट बैंक के लिहाज से बेंच का मुद्दा पश्चिम में अहम है। मगर जब हाईकोर्ट के वकीलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया और राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक विफल कर देने की चेतावनी दे डाली तो तत्काल बयान का खंडन भी कर दिया गया ताकि कार्यसमिति की बैठक निर्विघ्न संपन्न हो सके।
शायद यही वजह है प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य जब हाईकोर्ट में स्पष्टीकरण देने पहुंचे तो उन्होंने पश्चिमी यूपी में बेंच को लेकर पार्टी के नजरिए पर कुछ नहीं कहा, वह सिर्फ बयान को नकार कर अपना पल्ला झाड़ते दिखे।