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केरल में किशोरी की मौत: क्या कोरिया से जुड़े हैं तार? साइबर क्राइम एंगल पर जांच, पुलिस की रडार पर 'ब्लैक वेनम'

Sat, 14 Feb 2026 06:40 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

केरल के कोच्चि में 16 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच एजेंसियां संगठित ऑनलाइन गतिविधियों की भूमिका की शक है। आदित्या घर से स्कूल जाने के लिए निकली थी, लेकिन बाद में पास की पत्थर खदान में मृत मिली। 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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केरल के कोच्चि में 16 वर्षीय आदित्या की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में अब चौंकाने वाले पहलू सामने आया है। जांच एजेंसियां इस मामले को संगठित ऑनलाइन गतिविधियों के संदर्भ में देख रही हैं। अधिकारियों ने एक संदिग्ध इंस्टाग्राम अकाउंट की भूमिका की जांच शुरू की है, जिस पर नाबालिगों को कथित रूप से निशाना बनाने का संदेह है। आदित्या 27 जनवरी को स्कूल जाने की बात कहकर घर से निकली थी, लेकिन बाद में वह अपने घर के पास स्थित एक पत्थर की खदान में मृत पाई गई। घटनास्थल से मिले एक कथित सुसाइड नोट में उसने एक कोरियाई मित्र की कथित मृत्यु से जुड़े भावनात्मक आघात का जिक्र किया था। हालांकि, पुलिस का मानना है कि मामले के पीछे ऑनलाइन प्रभाव की भी जांच आवश्यक है।

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ब्लैक वेनम नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट पर जांच केंद्रित
जांच के केंद्र में ‘ब्लैक वेनम’ नाम का एक इंस्टाग्राम अकाउंट है, जिसे वह फॉलो कर रही थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस अकाउंट पर कोरियाई संगीत बैंड से संबंधित पोस्ट और ऐसी सामग्री साझा की जाती थी, जो किशोरों के कोरियाई पॉप संस्कृति के प्रति आकर्षण को भुनाने के उद्देश्य से तैयार की गई प्रतीत होती है। जानकारी के मुताबिक, घटना से पहले इस अकाउंट के 30 से अधिक फॉलोअर्स थे, लेकिन लड़की की मौत के बाद अचानक वे फॉलोअर्स गायब हो गए, जिससे समन्वित गतिविधि की आशंका जताई जा रही है।

छात्र स्कूल के नियमों का उल्लंघन करते हुए मोबाइल फोन ला रहे थे
साइबर फोरेंसिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ छात्र स्कूल के नियमों का उल्लंघन करते हुए मोबाइल फोन ला रहे थे। एक ही डिवाइस से कई इंस्टाग्राम अकाउंट संचालित कर रहे थे। एक मोबाइल फोन, जिसे फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया था, उसमें आठ अलग-अलग इंस्टाग्राम अकाउंट लॉगिन पाए गए।  पुलिस ने इन लॉगिन विवरणों को सुरक्षित कर लिया है। इनमें से कई खाते फर्जी नामों से बनाए गए थे, जिससे उनकी पहचान और ट्रैकिंग चुनौतीपूर्ण हो गई है।
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 ऑनलाइन समूहों में गुमनाम खातों के जरिए बात करने का संदेह
जांचकर्ताओं को संदेह है कि नाबालिग बंद ऑनलाइन समूहों में गुमनाम खातों के जरिए बात कर रहे थे। इसके साथ ही सांकेतिक संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे थे। अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या कोई संगठित साइबर नेटवर्क भावनात्मक रूप से संवेदनशील सामग्री प्रसारित कर किशोरों को मानसिक रूप से प्रभावित कर रहा था। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अकाउंट की निगरानी करना बेहद कठिन है, क्योंकि कई अकाउंट विदेशी सर्वरों या निजी डिजिटल माध्यमों के जरिए संचालित होते हैं। 
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