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केरल के इस्लामिक प्रचारक ने बताया ओणम और क्रिसमस को हराम

Mon, 18 Jul 2016 09:09 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : getty images
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केरल के सलाफी प्रचारक शमसुद्दीन फरीद ने ओणम और क्रिसमस को गैर-इस्लामिक बताते हुए हराम करार दिया है। सलाफी इस्लाम की एक विचारधारा है। शमसुद्दीन इस विचारधारा से जुड़े 'एक्सट्रीम सलाफी' नाम के संगठन के अधिकारिक प्रवक्ता है। इस संगठन पर केरल के मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथ की तरफ मोड़ने में अहम भूमिका निभाने का आरोप लगते रहे हैं।
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शमसुद्दीन ने कहा, 'हम ओणम और क्रिसमस जैसे त्योहारों में शामिल नहीं होते, क्योंकि इनमें एक से अधिक देवताओं को मानने वाला विचार शामिल है। आप कह सकते हैं कि ओणम फसल से जुड़ा त्योहार है, लोकिन उसकी जड़ में हिंदू मान्यताएं हैं।'

शमसुद्दीन ने कहा, 'केरल के कई मुस्लिम संगठन लोगों को इस्लाम का सही पाठ पढ़ाने से डरते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इसका पालन करना समाज में रहते हुए मुमकिन नहीं है। शमसुद्दीन ने कहा कि हमें इस्लाम का पालन करने में कोई दिक्कत नहीं है, फिर चाहे समाज इसके ऊपर त्योंरियां क्यों ना चढ़ाए।'
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'मुसलमानों को फिल्में देखना हराम'

ओणम त्यौहार - फोटो : getty images
शमसुद्दीन का मानना है कि मुसलमानों को फिल्में देखना हराम है। वे कभी अपनी दाढ़ी नहीं कटवाता और मुसलमानों से गैर मुसलमानों के आयोजनों में हिस्सा ना लेने को कहता है। 45 वर्षीय शमसुद्दीन एक वक्त में मल्लपुरम के एक स्कुल में शिक्षक थे, लेकिन अब वह केरल में सलाफी आंदोलन का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

शमसुद्दीन फरीद का नाम पहले शमसुद्दीन पलाथ था, लेकिन हाल ही में शमसुद्दीन ने अपने नाम से पलाथ हटाकर फरीद रख लिया। फरीद उनके पिता का नाम है जबकि पलाथ उनके गांव का नाम था। शमसुद्दीन को लगता है कि फरीद शब्द ज्यादा इस्लामिक हैं और इसीलिए उसने अपने नाम से पलाथ को हटा दिया।
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