केरल के कोल्लम की एक विजिलेंस कोर्ट ने बुधवार को त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के पूर्व अध्यक्ष और कमिश्नर एन. वासु को सबरीमाला सोने की हेराफेरी मामले में जमानत दे दी। यह राहत उन्हें इसलिए मिली क्योंकि विशेष जांच टीम (एसआईटी) उनकी गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने में नाकाम रही। कानून के मुताबिक, अगर तय समय में चार्जशीट पेश नहीं होती, तो आरोपी को जमानत का हक मिल जाता है।
एक और आरोपी हुआ रिहा
एन. वासु को 11 नवंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था। वह सोने की प्लेटों में हुई गड़बड़ी के मामले में तीसरे आरोपी हैं और जमानत पाने वाले पांचवें आरोपी बन गए हैं। इससे पहले मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी और मुरारी बाबू को भी कोर्ट से राहत मिल गई थी। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद वासु को जेल से रिहा कर दिया जाएगा। वह (सीपीआई-एम) के नेता भी हैं।
यह पूरा मामला मंदिर के सोने की प्लेटों से जुड़ा है। आरोप है कि जब वासु देवस्वोम कमिश्नर थे, तब सोने की प्लेटों को रिकॉर्ड में तांबे की प्लेट बताया गया था। एसआईटी का कहना है कि यह मंदिर की संपत्ति के साथ बड़ी धोखाधड़ी थी। हालांकि, वैज्ञानिक जांच की रिपोर्ट आने में देरी हुई, जिस वजह से जांच टीम समय पर अपनी रिपोर्ट पूरी नहीं कर पाई।
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इन आरोपियों की रिमांड बढ़ाई गई
गिरफ्तारी के बाद से ही वासु की तबीयत खराब है। वह पूजापुरा सेंट्रल जेल के अस्पताल में भर्ती हैं। पिछली बार जब उन्हें कोर्ट में पेश किया गया था, तब उन्हें हथकड़ी पहनाई गई थी। इस बात पर काफी विवाद भी हुआ था। दूसरी तरफ, कोर्ट ने बुधवार को मामले के अन्य आरोपियों पंकज भंडारी, गोवर्धन और के.एस. बैजू की रिमांड 14 दिन के लिए बढ़ा दी है।
जांच टीम ने एक पुराने पत्र का भी हवाला दिया है। इसमें मुख्य आरोपी पोट्टी ने तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष से सोने का इस्तेमाल एक लड़की की शादी के लिए करने की इजाजत मांगी थी। एसआईटी के मुताबिक, वासु को पता था कि पोट्टी के पास जरूरत से ज्यादा सोना है, फिर भी उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। वासु ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उनके कार्यकाल में कोई गड़बड़ी नहीं हुई।
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