दक्षिण भारत के राज्य केरल का आधिकारिक नाम अब ‘केरलम’ हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को इसकी अधिसूचना जारी की। इसमें कहा गया कि केरल नाम परिवर्तन अधिनियम, 2026 के प्रावधान 25 अगस्त 2026 से लागू होंगे। यानी मंगलवार से सरकारी स्तर पर राज्य को ‘केरलम’ के नाम से जाना जाएगा। यह बदलाव केंद्र सरकार की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के बाद प्रभावी हुआ है।
नाम बदलने का फैसला कैसे हुआ?
केरल का नाम बदलने की प्रक्रिया राज्य विधानसभा से शुरू हुई थी। केरल विधानसभा ने वर्ष 2024 में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए कानून बनाने का अनुरोध किया था। राज्य सरकार ने जून 2024 में विधानसभा का यह प्रस्ताव केंद्र को भेजा। इसके बाद नाम बदलने से जुड़ा विधेयक आगे बढ़ा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस महीने की शुरुआत में विधेयक को मंजूरी दी, जिसके बाद यह कानून बन गया।
संसद में 'केरलम' के विधेयक पर क्या हुआ?
राज्य का नाम बदलने वाले विधेयक को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिली। केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को लोकसभा ने 11 अगस्त को पारित किया। इसके अगले दिन यानी 12 अगस्त को राज्यसभा ने भी इसे मंजूरी दे दी। राज्यसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया था कि केरल विधानसभा ने 2024 में राज्य का नाम ‘केरलम’ करने के लिए प्रस्ताव पारित किया था। उन्होंने कहा था कि विधेयक के तहत केरल राज्य को अब ‘केरलम’ के नाम से जाना जाएगा।
अब सरकारी दस्तावेजों में क्या बदलेगा?
केरल (नाम परिवर्तन) अधिनियम में राज्य के नाम को बदलने के साथ संविधान में जरूरी संशोधन और उससे जुड़े अन्य प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार की 25 अगस्त की अधिसूचना के साथ कानून के प्रावधान लागू हो गए हैं। इसका सीधा मतलब है कि राज्य का आधिकारिक नाम अब ‘केरल’ के बजाय ‘केरलम’ होगा। नाम बदलने की पूरी प्रक्रिया राज्य विधानसभा के प्रस्ताव से शुरू होकर संसद की मंजूरी और राष्ट्रपति की स्वीकृति तक पहुंची और अब केंद्र की अधिसूचना के साथ लागू हो गई है।