केरल हाईकोर्ट ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 भाजपा पार्षदों को चार सप्ताह के भीतर दोबारा शपथ लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने माना कि कुछ पार्षदों ने निर्धारित प्रारूप के बजाय देवी-देवताओं के नाम पर शपथ ली थी।
केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। जिसके कारण राज्य की राजधानी में एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील विवाद को फिर से हवा दे दी है। न्यायालय ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 भाजपा पार्षदों को चार सप्ताह के भीतर नए सिरे से शपथ लेने का निर्देश दिया है, क्योंकि पदभार ग्रहण करने के बाद उनके शपथ ग्रहण के तरीके पर सवाल उठाए गए थे।
क्या है पूरा मामला?
'देवी-देवताओं के नाम पर शपथ कैसे ली जा सकती?'
पिछली सुनवाई के दौरान, अदालत ने यह टिप्पणी की थी कि वैधानिक प्रारूप के अनुसार निर्वाचित प्रतिनिधियों को या तो ईश्वर के नाम पर शपथ लेनी होती है या गंभीर प्रतिज्ञा करनी होती है। तब पीठ ने सवाल उठाया था कि जब कानून में एक विशिष्ट प्रारूप निर्धारित है तो कई देवी-देवताओं के नाम पर शपथ कैसे ली जा सकती है। कोर्ट ने आगे कहा कि विशिष्ट देवी-देवताओं, भारत माता, राजनीतिक शहीदों, संगठनों या व्यक्तियों के नामों को शामिल करना कानूनों के तहत अनुमत नहीं है। याचिका पर कार्रवाई करते हुए अदालत ने बुधवार को 20 पार्षदों को चार सप्ताह के भीतर फिर से शपथ लेने का निर्देश दिया।
इससे पहले, याचिकाकर्ता ने मामले के अंतिम निर्णय होने तक पार्षदों को निगम की बैठकों में भाग लेने और मानदेय लेने से रोकने के लिए एक अंतरिम आदेश की भी मांग की थी। हालांकि, अदालत ने उस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति दी। इसके साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी शपथ की वैधता मामले के अंतिम परिणाम पर निर्भर रहेगी। राज्य के इतिहास में पहली बार, भाजपा ने एक आश्चर्यजनक जीत दर्ज करते हुए, चार दशकों से अधिक समय से शासन कर रही सीपीआई (एम) को सत्ता से हटाकर तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर कब्जा कर लिया।