सार
केरल सरकार ने फैसला किया कि भविष्य में बनने वाले सरकारी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय के नाम अब धर्म के आधार पर नहीं रखे जाएंगे। यह कदम संस्थानों को धर्मनिरपेक्ष और संविधान के समानता व समावेशिता के मूल्यों के अनुरूप बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
पिनाराई विजयन, केरल के मुख्यमंत्री
- फोटो : ANI
केरल सरकार ने मंगलवार को धर्मनिरपेक्षता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत सरकार ने फैसला किया है कि अब राज्य में बन रही नई सरकारी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और अन्य शैक्षिक संस्थाओं के नाम धर्म के आधार पर नहीं रखे जाएंगे। यह जानकारी मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद जारी किए गए सरकारी बयान में दी गई।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी शैक्षिक संस्थान धर्मनिरपेक्ष बने रहें और संविधान के समानता और समावेशिता के मूल्यों को दर्शाएं। जारी बयान के अनुसार यह निर्णय केवल भविष्य में स्थापित होने वाली संस्थाओं पर लागू होगा। इससे पहले से मौजूद सरकारी स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालयों के नाम पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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न्यायमूर्ति जेबी कोशि आयोग की रिपोर्ट को भी मंजूरी
सूत्रों ने बताया कि यह कदम सरकार द्वारा कैबिनेट में लिए गए कई नीतिगत फैसलों का हिस्सा है। इसके अलावा, कैबिनेट ने न्यायमूर्ति जे.बी. कोशि आयोग की रिपोर्ट को भी मूल रूप से मंजूरी दी और इसे आधिकारिक रूप से प्रकाशित करने का निर्णय लिया। यह आयोग केरल में क्रिश्चियन अल्पसंख्यकों की शिक्षा और आर्थिक पिछड़ेपन तथा कल्याण से जुड़े मामलों का अध्ययन करने के लिए नियुक्त किया गया था।
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केरल के नाम में बदलाव को मंजूरी
बता दें कि मंगलवार को
केरल का दिन देशभर में चर्चा का विषय रहा। इसका बड़ा कारण यह रहा कि केरल का नाम बदलकर केरलम करने को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। मंगलवार (24 फरवरी) को कैबिनेट की बैठक में इससे जुड़े एक प्रस्ताव पर मुहर लगाई।
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