केरल में यौन शोषण और जबरन गर्भपात के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे निलंबित विधायक राहुल ममकूट्टाथिल के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक, दोनों मोर्चों पर बड़ा कार्रवाई हुई है। गुरुवार को तिरुवनंतपुरम की एक सत्र अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जबकि कुछ घंटे बाद कांग्रेस ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी निष्कासित कर दिया। अदालत के सख्त रुख और पार्टी की कठोर कार्रवाई ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।
तिरुवनंतपुरम प्रिंसिपल जिला एवं सत्र न्यायाधीश नज़ीरा एस ने दो दिनों तक चली सुनवाई के बाद अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने का फैसला सुनाया। सुनवाई इन-कैमरा की गई ताकि पीड़िता की गोपनीयता बनी रहे। अभियोजन पक्ष ने अदालत में ऑडियो क्लिप, चैट डिटेल और अन्य दस्तावेज पेश किए, जिनमें पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों का समर्थन मिलता है। बचाव पक्ष ने दावा किया कि संबंध सहमति से था, लेकिन अभियोजन का आरोप है कि विधायक ने महिला से बलात्कार किया और बाद में गर्भपात के लिए मजबूर किया। अदालत ने पूरा रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि आरोपी को जमानत देने के लिए कोई आधार नहीं है।
नए साक्ष्य और ताजा केस ने बढ़ाई मुश्किलें
अदालत ने अभियोजन पक्ष से उन दस्तावेजों को भी पेश करने को कहा, जो पहले रिकॉर्ड में नहीं थे। निर्देश के बाद अभियोजन ने गुरुवार को अतिरिक्त साक्ष्य जमा किए। इसके अलावा कांग्रेस द्वारा पुलिस को भेजी गई एक नई शिकायत के आधार पर दर्ज ताजा यौन शोषण केस की जानकारी भी अदालत में रखी गई। दो अलग-अलग मामलों में गंभीर आरोप और नए साक्ष्यों के चलते अदालत ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता और उपलब्ध सामग्री को देखते हुए अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती।
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कांग्रेस ने भी की बड़ी कार्रवाई
कांग्रेस ने भी मामले में कड़ा कदम उठाते हुए ममकूट्टाथिल को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया। केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सनी जोसेफ ने कहा कि पार्टी ने आरोपों की विस्तृत समीक्षा की और पाया कि ऐसे व्यक्ति को संगठन में रखना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि विधायक पहले ही निलंबित किए जा चुके थे, लेकिन नए आरोप और अदालत के फैसले के बाद कठोर कार्रवाई अनिवार्य हो गई। पार्टी ने साफ किया कि वह महिलाओं पर अत्याचार या सत्ता के दुरुपयोग को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं करेगी।
इन धाराओं में मामला दर्ज
पलक्कड़ के विधायक पर भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है। इनमें भरोसे की स्थिति का दुरुपयोग कर दुष्कर्म, गर्भावस्था की जानकारी होने के बावजूद दुष्कर्म, बार-बार दुष्कर्म, बिना सहमति गर्भपात, धमकी देना और चोट पहुंचाना शामिल है। आईटी एक्ट की धारा 66(E) भी जोड़ी गई है क्योंकि आरोपी पर निजी तस्वीर रिकॉर्ड करने और गलत इस्तेमाल की धमकी देने का आरोप है। मामले की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई है। पुलिस को आशंका है कि वह राज्य से बाहर निकल चुका है, इसलिए उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया गया है। तमिलनाडु और कर्नाटक में उसकी तलाश तेज कर दी गई है।
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