कासरगोड नगरपालिका में हुए निकाय चुनाव में कुल 39 सीटों में से मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिम लीग और हिंदू बहुल क्षेत्रों में भाजपा को जीत मिली। यहां भाजपा ने 12 सीटें और मुस्लिम लीग ने 22 सीटों पर जीत हासिल की।
केरल के मंत्री साजी चेरियन के कासरगोड और मलप्पुरम में हुए निकाय चुनावों को लेकर दिए गए बयान पर सियासी बवाल मचा हुआ है। इस बीच साजी चेरियन ने अपने बयान पर सफाई देते हुए दावा किया कि नतीजों को लेकर उनकी टिप्पणियों को तोड़-मरोड़ कर लोगों को गुमराह करने के लिए इस्तेमाल किया गया।
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कांग्रेस ने चेरियन की टिप्पणियों को उन क्षेत्रों में मुस्लिम लीग उम्मीदवारों की जीत के संदर्भ में देखा था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चेरियन ने कहा कि कासरगोड नगरपालिका में कुल 39 सीटें हैं, जहां मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिम लीग को और हिंदू बहुल क्षेत्रों में भाजपा को जीत मिली।
साजी चेरियन को बयान पर क्यों देनी पड़ी सफाई?
उन्होंने साफ किया कि उनका आशय यह बताना था कि धर्मनिरपेक्षता की बात करने वाली पार्टियों का प्रदर्शन कमजोर रहा। उनके अनुसार सीपीआई(एम) को केवल एक सीट और कांग्रेस को दो सीटें मिलीं। वहीं, 'सांप्रदायिक राजनीति की बात करने वाली' भाजपा ने 12 सीटें जीतीं, जबकि मुस्लिम लीग के 22 उम्मीदवार निर्वाचित हुए।
चेरियन ने कहा कि उन्होंने केवल विजेताओं के नाम पढ़े जाने की बात कही थी।
उन्होंने कहा कि उनकी चिंता यह थी कि ऐसी स्थिति केरल के अन्य हिस्सों में दोहराई न जाए।
उन्होंने कहा कि आरएसएस की ओर से फैलाई जा रही 'सांप्रदायिकता' का विरोध किया जाना जरूरी है।
उन्होंने कहा, 'आरएसएस की ओर से बढ़ाई जा रही सांप्रदायिकता का मुकाबला अल्पसंख्यक सांप्रदायिकता से नहीं किया जा सकता। इसके लिए केरल में वामपंथ को मजबूत करना होगा।'
कांग्रेस ने चेरियन के बयान को लेकर सीएम विजयन पर साधा निशाना
इस बीच चेरियन के बयान की कांग्रेस ने आलोचना की। केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ ने सोमवार को सवाल उठाया कि क्या यह बयान मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अनुमति से दिया गया था। उन्होंने कहा, 'यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या यह सीपीआई(एम) का आधिकारिक रुख है?'
चेरियन ने रविवार को यूडीएफ और केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीशन पर 'सांप्रदायिक और विभाजनकारी राजनीति' करने का आरोप लगाया था। अलप्पुझा में संवाददाताओं से बातचीत में चेरियन ने कहा था कि राज्य में सांप्रदायिकता के खिलाफ सख्त रुख सीपीआई(एम) और एलडीएफ ने ही अपनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि सीपीआई(एम) ने केरल में अपने नजरिए से देश के सामने एक वैकल्पिक शासन मॉडल पेश किया है।