केरल लव जिहाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) वैवाहिक स्थिति की जांच नहीं कर सकती। हालांकि शीर्ष अदालत ने कहा है कि एनआईए केरल में कथित लव जिहाद के आरोप की जांच जारी रख सकती है।
मंगलवार को एनआईए ने चीफ जस्टिस
दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चल रही जांच में काफी प्रगति हुई है। इस पर पीठ ने एनआईए से कहा हमें इस जांच से कोई मतलब नहीं है।
आपने क्या जांच की या किसे गिरफ्तार किया, इससे हमारा कोई वास्ता नहीं है। पीठ ने कहा कि आप इस पर जांच कर सकते हैं लेकिन आप वैवाहिक स्थिति के पहलू की जांच नहीं कर सकते।
पीठ ने कहा कि हादिया ने अदालत में उपस्थित होकर साफ तौर पर कहा है कि उसने अपनी मर्जी से सफीन जहां से शादी की है। पीठ ने कहा कि हम हादिया की पंसद पर कोई सवाल नहीं उठा सकते।
पीठ ने एनआईए से कहा कि आप यह जांच नहीं कर सकते कि हादिया ने अच्छे व्यक्ति से शादी की है या बुरे व्यक्ति से। हादिया बालिग है इसलिए उसे मर्जी से अपना निर्णय लेने का अधिकार है। शादी और अपना जीवनसाथी चुनने को आपराधिक षडयंत्र से अलग कर देखना होगा।
पीठ ने साफ किया कि वह सिर्फ इस कानूनी मसले का परीक्षण करेगी कि हैबियस कॉरपस की याचिका पर शादी को निरस्त करने का केरल हाईकोर्ट का फैसला सही है या नहीं। अगली सुनवाई 22 फरवरी को होगी।
मालूम हो कि गत वर्ष 27 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने हादिया को पति की कस्टडी से अलग करते हुए उसे अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करने के लिए होम्योपैथ कॉलेज में भेज दिया था।