केरल के पूर्व प्रधान सचिव और लाइफ मिशन मामले में आरोपी एम शिवशंकर को सुप्रीम कोर्ट ने दो महीने की जमानत दे दी। जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने एम शिवशंकर को इलाज कराने के लिए दो महीने जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। पीठ ने कहा कि मौजूदा मामले में ऑपरेशन के बाद भी उपचार की जरूरत होगी तो याचिकाकर्ता को दो माह के लिए चिकित्सीय आधार पर रिहा किया जा सकता है।
ईडी ने किया जमानत का विरोध
सुप्रीम कोर्ट ने एम शिवशंकर को निर्देश दिया कि जमानत के दौरान वह किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे। वहीं ईडी की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जमानत का विरोध किया और कहा कि वह उच्च संवैधानिक पदाधिकारी के करीबी हैं और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना और एम शिवशंकर को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट से खारिज हो गई थी जमानत
इससे पहले एम शिवशंकर ने केरल हाईकोर्ट में भी जमानत की याचिका दायर की थी। हालांकि 13 अप्रैल को हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए एम शिवशंकर को जमानत देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि वह सत्ताधारी दल और मुख्यमंत्री के करीबी हैं, ऐसे में वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। एम शिवशंकर को लाइफ मिशन परियोजना में कथित विदेशी अंशदान अधिनियम के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया था।
क्या है लाइफ मिशन योजना
लाइफ मिशन योजना केरल की वामपंथी सरकार की महत्वकांक्षी योजना थी। इस परियोजना की शुरुआत राज्य के बेघर नागरिकों को घर उपलब्ध कराने के लिए की गई थी। इस परियोजना के तहत वडक्कनचेरी में गरीबों के लिए घर बनाए जाने थे। इन घरों का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठन रेड क्रिसेंट के पैसों का उपयोग करके किया जाना था। इन घरों के निर्माण का ठेका यूनिटैक बिल्डर्स और साने वेंचर्स को दिया गया। आरोप है कि यूनिटैक बिल्डर्स ने ठेका पाने के लिए तत्कालीन प्रधान सचिव एम शिवशंकर और यूएई में भारत के महावाणिज्यदूत को रिश्वत दी गई थी। सोने की तस्करी मामले में ईडी ने जब यूएई के महावाणिज्य दूतावास में काम करने वाली स्वप्ना सुरेश को गिरफ्तार किया तो लाइफ मिशन योजना में कथित धांधली का खुलासा हुआ।