केरल के कानून मंत्री ने कहा कि सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा कई सांविधानिक जटिलताओं से जुड़ा है और सरकार बातचीत के बाद ही अपना रुख तय करेगी। मंत्री ने बताया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और सरकार श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। पढ़ें रिपोर्ट-
केरल में सत्ताधारी वाममोर्चा ने कहा कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा कई सांविधानिक जटिलताओं से जुड़ा मामला है। इसलिए सरकार बातचीत के जरिए सही रुख अपनाएगी। प्रदेश सरकार का रुख साफ करते हुए कानून मंत्री पी. राजीव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह सात सांविधानिक सवालों पर ध्यान देने के बाद ही समीक्षा याचिका पर विचार करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार आस्था रखने वालों के विश्वास की रक्षा के लिए है और वह उनके साथ खड़ी रहेगी।
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दो हिंदू संगठन प्रवेश के खिलाफ: केरल के दो बड़े हिंदू जाति संगठनों नायर सेवा सोसायटी (एनएसएस) और श्री नारायण धर्म परिपालन (एसएनडीपी) योगम ने फिर कहा कि मासिक धर्म वाली महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश नहीं मिलना चाहिए। एनएसएस के महासचिव जी सुकुमारन नायर ने कहा कि संगठन ने सबरीमाला में मासिक धर्म वाली महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ अपना रुख नहीं बदला है। वहीं, श्री नारायण धर्म परिपालन (एसएनडीपी) योगम के महासचिव वेल्लप्पल्ली नटेसन ने कहा कि संगठन मासिक धर्म वाली महिलाओं के प्रवेश का विरोध करता है।
विपक्ष ने कहा-सरकार अपना रुख साफ करे: केरल में विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने माकपा सरकार से सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर अपना रुख साफ करने की अपील की। साथ ही, इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दाखिल करने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की संविधान पीठ करेगी सुनवाई
उधर, धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की संविधान पीठ सुनवाई करेगी। इसमें केरल के सबरीमला मंदिर पर आए फैसले की समीक्षा भी शामिल है। सुनवाई सात अप्रैल से शुरू होगी और 22 अप्रैल को खत्म होने की संभावना है।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि नौ सदस्यीय संविधान पीठ याचिकाओं पर निर्णायक सुनवाई करेगी। पीठ ने सभी पक्षों से कहा कि वे 14 मार्च तक या इससे पूर्व अपनी लिखित दलीलें दाखिल करें।