केरल के इडुक्की में भूस्खलन के बाद होता बचाव कार्य
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केरल में भूस्खलन और मिट्टी सरकने की घटनाओं की वजह बनी भारी बारिश लोगों की आंखों में आंसुओं के सैलाब की वजह भी बन गई है। इन घटनाओं के चलते होने वाली मौतों के बीच मलबे में दबे अपने परिजनों को बाहर निकालने के लिए लोग बचाव और राहत कर्मियों से गुहार लगा रहे हैं।
शुक्रवार को हुए भूस्खलन में 70 वर्षीय महिला करुपई के परिजनों का कोई अता-पता नहीं है। जैसे-जैसे दिन बीतते जा रहे हैं करुपई की उसके परिवाल वालों से मिलने की उम्मीद भी धुंधली होती जा रही है। बचाव कर्मी जैसे ही कोई शव निकालते हैं वह दौड़कर यही देखने जाती हैं कि वह शव उनके किसी अपने का न हो।
बता दें कि राजमाला के पेट्टीमुडी में एक-एक कमरे वाले आपस में जुड़े बीस घरों पर मलबा गिरने से 82 मजदूर और उनके परिजन उसके नीचे दब गए थे। करुपई के पति षणमुगम, तीन बेटियां, दामाद और तीन नाती-पोते भी उस मलबे के नीचे दबे हैं। षणमुगम, उनकी बेटियां और दामाद चाय के बागान में काम करते थे।
एनडीआरएफ और अन्य बचाव कर्मियों द्वारा बाहर निकाले जा रहे शवों की संख्या रविवार शाम तक 42 हो गई है। एक अन्य बुजुर्ग रमार के दुख की भी कोई सीमा नहीं है। उनका बेटा, बेटी और परिवार के 13 अन्य सदस्य भी इस हादसे का शिकार हो गए। रमार का कहना है, 'सभी चले गए। मैं उन्हें देखे बिना नहीं जाऊंगा।'