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Kerala: यमन में फांसी की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स को बचाने की कोशिश, मुस्लिम धर्मगुरु कर रहे प्रयास

Mon, 14 Jul 2025 07:05 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

केरल की रहने वाली नर्स निमिषा प्रिया को यमन में फांसी से बचाने के लिए भारत के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद (कांथापुरम मुसलियार) ने मोर्चा संभाल लिया है। 94 वर्षीय मुस्लिम धर्मगुरु यमन के धार्मिक नेताओं के लगातार संपर्क में हैं और शरिया कानून के तहत ब्लड मनी यानी मुआवजे के विकल्प पर जोर दिया जा रहा है। निमिषा पर अपने यमनी बिजनेस पार्टनर की हत्या का आरोप है, जिसके लिए उन्हें 2020 में मौत की सजा सुनाई गई थी।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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केरल की रहने वाली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में फांसी की सजा से बचाने के लिए मशहूर सुन्नी मुस्लिम धर्मगुरु कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने पहल की है। 94 वर्षीय मुसलियार जिन्हें आधिकारिक रूप से शेख अबूबकर अहमद और भारत के ग्रैंड मुफ्ती के रूप में जाना जाता है, यमन के धार्मिक नेताओं से संपर्क में हैं और सभी संभावित प्रयास कर रहे हैं ताकि निमिषा की जान बचाई जा सके।

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बता दें कि मामले में निमिषा प्रिया पर आरोप है कि उन्होंने साल 2017 में अपने यमनी बिजनेस पार्टनर तालाल अब्दो महदी की हत्या की थी। इस मामले में उन्हें 2020 में मौत की सजा सुनाई गई थी और उनकी अंतिम अपील 2023 में खारिज हो गई। ऐसे में अब 16 जुलाई 2025 को उन्हें फांसी देने की तारीख तय की गई है। फिलहाल वह यमन की राजधानी सना की जेल में बंद हैं।

मुआवजे के विकल्प पर दिया जा रहा है जोर
मामले में सूत्रों की माने तो शरिया कानून के तहत हत्या के मामलों में ब्लड मनी (मुआवजा) का विकल्प होता है, जिसमें आरोपी के परिवार को मृतक के परिवार को वित्तीय मुआवजा देना होता है। अगर मृतक का परिवार यह मुआवजा स्वीकार कर लेता है, तो मौत की सजा को रोका जा सकता है।

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धार्मिक नेताओं से लगातार बातचीत कर रहे मुसलियार

ऐसे में मुसलियार यमन के धार्मिक नेताओं से लगातार बातचीत कर रहे हैं, जो तालाल महदी के परिवार के संपर्क में हैं। कहा जा रहा है कि ब्लड मनी को लेकर बातचीत हो चुकी है और इस संबंध में जानकारी केरल में संबंधित पक्षों तक पहुंचा दी गई है। हालांकि, अभी तक किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं निमिषा की मदद और बातचीत को सुचारु रूप से चलाने के लिए मुसलियार के मुख्यालय पर एक विशेष कार्यालय भी खोला गया है।

क्या है भारत सरकार का रुख?
इस बीच, सोमवार को भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं कर सकती। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच को बताया कि "भारत सरकार अपनी पूरी कोशिश कर रही है और यमन के प्रभावशाली लोगों से बातचीत भी की जा रही है। हालांकि ऐसे में अब फैसला मृतक के परिवार और ब्लड मनी पर बातचीत पर निर्भर करता है। अगर वे मुआवजा स्वीकार करते हैं, तो निमिषा की फांसी टल सकती है।

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कौन है निमिषा प्रिया?

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गौरतलब है कि केरल के पालक्काड जिले की रहने वाली निमिषा प्रिया यमन में बतौर नर्स काम कर रही थीं। इसके बाद 2017 में उनके ऊपर अपने ही बिजनेस पार्टनर की हत्या का आरोप लगा। इसी आरोप के चलते साल 2020 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। मौत की सजा से बचने के लिए निमिषा की अंतिम अपील 2023 में खारिज हो चुकी है और 16 जुलाई को फांसी तय है।

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