केरल की रहने वाली नर्स निमिषा प्रिया को यमन में फांसी से बचाने के लिए भारत के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद (कांथापुरम मुसलियार) ने मोर्चा संभाल लिया है। 94 वर्षीय मुस्लिम धर्मगुरु यमन के धार्मिक नेताओं के लगातार संपर्क में हैं और शरिया कानून के तहत ब्लड मनी यानी मुआवजे के विकल्प पर जोर दिया जा रहा है। निमिषा पर अपने यमनी बिजनेस पार्टनर की हत्या का आरोप है, जिसके लिए उन्हें 2020 में मौत की सजा सुनाई गई थी।
केरल की रहने वाली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में फांसी की सजा से बचाने के लिए मशहूर सुन्नी मुस्लिम धर्मगुरु कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने पहल की है। 94 वर्षीय मुसलियार जिन्हें आधिकारिक रूप से शेख अबूबकर अहमद और भारत के ग्रैंड मुफ्ती के रूप में जाना जाता है, यमन के धार्मिक नेताओं से संपर्क में हैं और सभी संभावित प्रयास कर रहे हैं ताकि निमिषा की जान बचाई जा सके।
मुआवजे के विकल्प पर दिया जा रहा है जोर
मामले में सूत्रों की माने तो शरिया कानून के तहत हत्या के मामलों में ब्लड मनी (मुआवजा) का विकल्प होता है, जिसमें आरोपी के परिवार को मृतक के परिवार को वित्तीय मुआवजा देना होता है। अगर मृतक का परिवार यह मुआवजा स्वीकार कर लेता है, तो मौत की सजा को रोका जा सकता है।
क्या है भारत सरकार का रुख?
इस बीच, सोमवार को भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं कर सकती। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच को बताया कि "भारत सरकार अपनी पूरी कोशिश कर रही है और यमन के प्रभावशाली लोगों से बातचीत भी की जा रही है। हालांकि ऐसे में अब फैसला मृतक के परिवार और ब्लड मनी पर बातचीत पर निर्भर करता है। अगर वे मुआवजा स्वीकार करते हैं, तो निमिषा की फांसी टल सकती है।
ये भी पढ़ें:- Fit India: समोसे-कचौड़ी में कितना तेल-चीनी? सरकारी दफ्तरों में लगेगा बोर्ड; मोटापे के खिलाफ केंद्र का अभियान
कौन है निमिषा प्रिया?