मध्य केरल के त्रिशूर शहर में हजारों लोग प्रतिष्ठित त्योहार 'त्रिशूर पूरम' में शामिल हुए। इसे प्रसिद्ध वडक्कुनाथन मंदिर के विशाल मैदान में पूरी भव्यता के साथ आयोजित किया गया। इस वार्षिक उत्सव को आम तौर पर राज्य सभी मंदिर त्योहारों की जननी के रूप में जाना जाता है। इसमें 30 सजे-धजे हाथियों को परामेक्कावु और तिरुवम्बडी मंदिर में सदियों पुराने रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार परेड के लिए एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े किया गया। परेड करने वाले हाथियों को अधिकारियों की ओर से फिटनेस प्रमाणपत्र दिया गया था।
थेक्किंकाडु मैदान में आयोजित पूरम को देखने के लिए हजारों लोग पहुंचे। सजे-धजे हाथियों की परेड और पारंपरिक ताल प्रदर्शन ने लोगों को मंत्रमुग्ध किया। हाथियों के ऊपर सजी हुई रेशम की छतरियों के साथ लोग बैठे हुए थे। हमेशा की तरह नेट्टीपट्टम (आकर्षक टोपी), वेंचमारम (मोरपंखों से बना सजावटी पंखा) और मुथुक्कुडा (सजी हुई छतरियां) के प्रदर्शन ने उत्सव में रंग भर दिया। शाम छह बजे के बाद परमेक्कावु और तिरुवम्बडी देवस्वोम दोनों में भगवान राम, शिव और हनुमान सहित विभिन्न देवताओं के कई रोशनी वाले कटआउट प्रदर्शित किए गए।