लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल
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लक्षद्वीप के पूर्व सांसद मोहम्मद फैजल को राहत देते हुए केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को हत्या के प्रयास के मामले में उनकी 10 साल की सजा पर रोक लगा दी। अदालत ने मामले में फैजल के भाई सहित अन्य तीन दोषियों को भी यही राहत दी है। उच्च न्यायालय का विस्तृत आदेश अभी उपलब्ध नहीं है। भारत के उप सॉलिसिटर जनरल (DSGI) मनु एस, जिन्होंने द्वीप प्रशासन का प्रतिनिधित्व किया, ने उच्च न्यायालय के आदेश की पुष्टि की।
लक्षद्वीप प्रशासन ने किया राहत का विरोध
लक्षद्वीप प्रशासन दोषियों की सजा को निलंबित करने का विरोध करते हुए कहा था कि उन्हें राहत देने से न्यायिक प्रक्रिया में लोगों का विश्वास हिल जाएगा। प्रशासन ने आगे यह भी कहा कि फैजल और उनके भाई, जो एक सरकारी स्कूल में शिक्षक थे, द्वारा किए गए अपराध ने द्वीप द्वीपसमूह के समाज को झकझोर कर रख दिया था, जहां बहुत कम अपराधों की सूचना मिलती है।इसलिए, उनकी रिहाई से समाज में गलत संदेश जाएगा।
मामले में कुल 37 आरोपी थे
मामले में 37 आरोपी थे। उनमें से दो की मौत हो गई थी और उनके खिलाफ मुकदमा खत्म हो गया था। शेष 35 में से अयोग्य सांसद और उनके भाई सहित चार आरोपियों को दोषी ठहराया गया और 10 साल कैद की सजा सुनाई गई, जबकि बाकी को बरी कर दिया गया।
क्या है मामला?
हत्या के प्रयास के इस मामले में साल 2009 में केस दर्ज किया गया था। मामले से जुड़े वकील ने बताया कि जब 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान पदनाथ सालिह अपने पड़ोस में एक राजनीतिक मामले में दखल देने पहुंचे थे। इसी दौरान एनसीपी सांसद मोहम्मद फैजल और उनके साथियों ने पदनाथ सालिह पर हमला कर दिया। वहीं दोषी ठहराए गए सांसद मोहम्मद फैजल ने कहा कि राजनीति के तहत उन्हें फंसाया गया है। वह इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में जाएंगे।