केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के एक पूर्व कर्मचारी को दोषी ठहराए जाने और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। उस कर्मचारी पर 2009 में केरल और तमिलनाडु में कई जगहों पर 45 दिनों तक एक स्कूली छात्रा के साथ दुष्कर्म करने का आरोप था।
क्या है पूरा मामला?
जस्टिस राजा विजयराघवन वी और के वी जयकुमार की बेंच ने पाया कि सिंचाई विभाग के तत्कालीन 36 वर्षीय कर्मचारी (आरोपी) ने 14-15 साल की लड़की का अपहरण किया। उसे केरल और तमिलनाडु में कई जगहों पर ले गया और लगभग 45 दिनों तक उसके साथ दुष्कर्म किया।
बेंच ने कहा क्या?
बेंच ने कहा कि आरोपी ने नाबालिग लड़की का अपहरण इस बहाने से किया था कि अगर वह किसी खास चर्च में कुछ प्रार्थनाओं में शामिल होगी, तो उसे भगवान का आशीर्वाद मिलेगा और वह 10वीं कक्षा की परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकेगी। इसके बाद आरोपी उसे कई जगहों पर ले गया, जबरदस्ती और चोट पहुंचाने का डर दिखाकर उसकी मर्जी के बिना उसके साथ दुष्कर्म किया।
हाई कोर्ट ने आरोपी की सजा और दोषसिद्धि के खिलाफ अपील को खारिज करते हुए कहा, 'इस मामले के तथ्यों, परिस्थितियों और सबूतों पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद, हमें लगता है कि अपीलकर्ता सजा के मामले में किसी भी नरमी का हकदार नहीं है।'
आरोपी ने अपने बचाव में क्या कहा?
आरोपी ने दावा किया था कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया था और लड़की अपनी मर्जी से उसके साथ गई थी। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि उसे झूठे बहाने से अगवा किया गया था और फिर चोट पहुंचाने की धमकी देकर कई जगहों पर उसके साथ दुष्कर्म किया गया।
पीड़िता के बयान को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?
आरोपी के दावों को खारिज करते हुए बेंच ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपीलकर्ता के खिलाफ आरोप को बिना किसी उचित संदेह के साबित करने में सफल रहा है। बेंच ने आगे कहा कि पीड़िता का बयान पूरी तरह से विश्वसनीय, स्वाभाविक और सच्चा माना जा सकता है। उसके बयान की पुष्टि मेडिकल सबूतों से भी होती है।
हाई कोर्ट ने कहा, 'बचाव पक्ष की झूठे मामले में फंसाने की कहानी बहुत ही अविश्वसनीय है। सेशंस जज ने मौखिक और दस्तावेजी दोनों तरह के सबूतों की बारीकी से जांच करने के बाद सही निष्कर्ष निकाला है। अपील में कोई दम नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए।