केरल हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अंतर-धार्मिक विवाह से जुड़े हर मामले को लव जिहाद का नाम नहीं दिया जाए। कोर्ट ने पुलिस से यह भी कहा कि वे ऐसे संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करे जो शादी करने वाले लड़के-लड़कियों को समुदाय के खिलाफ जाने पर प्रताड़ित करते हैं।
दरअसल, कोर्ट ने अनीश अहमद नाम के शख्स की याचिका पर सुनवाई करने हुए ये टिप्पणी की। अनीश का आरोप है कि उसने श्रुति नाम की लड़की से शादी की थी और अब उसे परिवारवालों ने कहीं गायब कर दिया है। अनीश का कहना है कि श्रुति को ऐसी जगह ले जाया गया है जहां उसे शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा है, ताकि वो ये शादी तोड़ दे।
कोर्ट ने कहा कि हम हर शादी को लव जिहाद और घर वापसी जैसे मामलों से नहीं जोड़ सकते। कोर्ट ने आगे कहा कि ये आगाह किया जाता है कि अंतर-धार्मिक विवाह के हर मामले को एक धार्मिक प्रचार से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। कोर्ट के मुताबिक हर ऐसे मामले को सनसनीखेज ढंग में पेश किया जा रहा है।
पढ़ें: लव जिहाद केस: केरल सरकार ने 90 मामलों की बनाई लिस्ट, NIA करेगी जांच