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केरल हाईकोर्ट: कुंभ की वायरल गर्ल को फिर मिली पुलिस सुरक्षा, मोनालिसा के लिए अदालत ने इसलिए दिए ये आदेश

सार

केरल हाईकोर्ट ने प्रयागराज कुंभ मेले से वायरल हुई युवती को 28 जुलाई तक दोबारा पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया। युवती ने दावा किया कि कुछ लोग उसका पीछा कर रहे हैं और व्हाट्सएप ग्रुप में उसकी लोकेशन साझा कर रहे हैं। 

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केरल उच्च न्यायालय (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार को प्रयागराज कुंभ मेले में एक वीडियो वायरल होने के बाद सुर्खियों में आई उस युवती को फिर से पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया। युवती ने दावा किया था कि कई समूह उसका पीछा कर रहे हैं और उसके ठिकाने के बारे में जानकारी फैला रहे हैं।

कोर्ट ने क्या निर्देश दिए? 

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पुलिस द्वारा यह सूचित किए जाने के बाद कि उसका पता नहीं लगाया जा सका है, उच्च न्यायालय ने 10 जुलाई को उसे पुलिस सुरक्षा प्रदान करने वाले अपने पूर्व आदेश को रद्द कर दिया था। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया था कि जब भी लड़की सुरक्षा की गुहार लगाते हुए उनके पास आए तो पुलिस उसकी सुरक्षा करे।

अगली सुनवाई कब? 
इसके बाद उसने पलारिवट्टम पुलिस स्टेशन में एक आवेदन दायर किया, जिसमें उसने दावा किया कि उसकी जान को खतरा है क्योंकि कुछ लोग व्हाट्सएप ग्रुपों में उसके ठिकाने के बारे में जानकारी फैला रहे थे। अदालत ने पलारिवट्टम पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर को मामले में पक्षकार बनाया और लड़की को 28 जुलाई को अगली सुनवाई की तारीख तक पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया। 

लड़की के पति फरमान पर उसके अपहरण का आरोप है। मध्य प्रदेश पुलिस ने लड़की के पिता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कराया है, जिसमें लड़की के पिता ने दावा किया है कि वह नाबालिग है।

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क्या है पूरा मामला? 
अपनी मनमोहक मुस्कान और आकर्षक आंखों के लिए जानी जाने वाली इंदौर की यह लड़की पिछले साल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कुंभ मेले में रुद्राक्ष की माला बेचते हुए उसका एक वीडियो एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर द्वारा साझा किए जाने के बाद इंटरनेट पर सनसनी बन गई।

 

बाद में उन्होंने अपने परिवार के विरोध के बावजूद, वरिष्ठ सीपीआई (एम) नेताओं की उपस्थिति में केरल में उस व्यक्ति से शादी कर ली। हालांकि, बाद में उसके परिवार ने दावा किया कि वह नाबालिग थी, जिसके चलते मध्य प्रदेश पुलिस ने फरमान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की विभिन्न धाराओं के तहत अपहरण सहित कई अपराधों के लिए मामला दर्ज किया।

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