जस्टिस अमित रावल और जस्टिस सीएस सुधा की डिवीजन पीठ ने कहा कि यदि एनएचएआई उचित सलाह लेता है तो वह मुकदमेबाजी में आने वाली लागत से बचेगा और भारी ब्याज देने के बोझ से बच जाएगा।
केरल हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की आलोचना की है। हाईकोर्ट ने कहा कि अदालतों पर मुकदमों का बोझ डालना प्राधिकरण की आदत हो गई है और मुआवजा देने में देरी के कारण भारी ब्याज का भुगतान करना पड़ता है।
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अपने आदेश में जस्टिस अमित रावल और जस्टिस सीएस सुधा की डिवीजन पीठ ने कहा कि यदि एनएचएआई उचित सलाह लेता है तो वह मुकदमेबाजी में आने वाली लागत से बचेगा और भारी ब्याज देने के बोझ से बच जाएगा। देश की अर्थव्यवस्था को बचाने में इसका बड़ा असर हो सकता है। पीठ का आदेश तिरुवनंतपुरम के एक भूमि मालिक की दायर अपील पर आया। याचिकाकर्ता की संपत्ति एनएचएआई ने एनएच 47 के कझाकुट्टम-करोदे खंड से बचने के लिए बाईपास बनाने के लिए अधिग्रहीत की गई थी। सक्षम प्राधिकारी के तय किए गए मुआवजे से असंतुष्ट जमीन मालिक ने मध्यस्थता की मांग की, जिसके दौरान भूमि का मूल्य 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया था। यह दावा करते हुए कि राशि अत्यधिक है, एनएचएआई ने तिरुवनंतपुरम में एक स्थानीय अदालत का दरवाजा खटखटाया। स्थानीय अदालत ने मध्यस्थता के आदेश को रद्द कर दिया। इसके बाद भूमि मालिक ने हाईकोर्ट में अपील की।