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CMRL Case: केरल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सीएमआरएल की याचिका खारिज; ईडी की जांच जारी रहेगी

Fri, 05 Jun 2026 11:32 AM IST
रिया दुबे कोच्चि, आईएएनएस

सार

केरल हाईकोर्ट ने सीएमआरएल की याचिका खारिज करते हुए ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग जांच जारी रखने की अनुमति दे दी है। अदालत ने कहा कि जांच शुरू करने के लिए पहले से अनुसूचित अपराध दर्ज होना जरूरी नहीं है।
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केरल हाईकोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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केरल हाईकोर्ट ने कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ी राहत देते हुए कंपनी की जांच रद्द करने की मांग खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद ईडी अब मामले में अपनी जांच आगे बढ़ा सकेगी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब ईडी निदेशक राहुल नवीन कोच्चि पहुंचे हैं और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करने वाले हैं।

अदालत ने किन-किन अपीलों को खारिज किया?

न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. और न्यायमूर्ति केवी जयकुमार की खंडपीठ ने शुक्रवार को CMRL की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी ने एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसने पहले ही ईडी जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
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अदालत ने कंपनी की उस दलील को भी स्वीकार नहीं किया जिसमें कहा गया था कि ईडी को जांच शुरू करने के लिए पहले किसी अनुसूचित अपराध का पंजीकरण आवश्यक है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आपराधिक अभियोजन के लिए अनुसूचित अपराध का पंजीकरण जरूरी हो सकता है, लेकिन संपत्ति कुर्क करने या धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच संबंधी अधिकारों के इस्तेमाल के लिए यह अनिवार्य शर्त नहीं है।

कोर्ट ने ईडी द्वारा दर्ज प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) को भी रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि ECIR कोई वैधानिक दस्तावेज नहीं है और इसकी अनुपस्थिति भी ईडी को नागरिक कार्रवाई शुरू करने से नहीं रोकती।

क्या है मामला?

CMRL पर वित्तीय अनियमितताओं, रिश्वतखोरी और धन शोधन के आरोपों की जांच चल रही है। यह मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है, क्योंकि आरोप हैं कि कंपनी ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी वीणा थैक्कंडियिल से जुड़ी आईटी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को अवैध भुगतान किए थे। इस मामले की जांच गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) भी कर रहा है।
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इससे पहले CMRL और उसके चार अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ईडी की कार्यवाही समाप्त करने की मांग की थी। हालांकि एकल पीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि एजेंसी द्वारा समन जारी किए जाने के तुरंत बाद दायर की गई चुनौती समय से पहले की गई है।

एकल पीठ ने अपने आदेश में SFIO की शिकायत का भी उल्लेख किया था, जिसमें कंपनी अधिनियम के तहत अपराधों का आरोप लगाया गया है। ये अपराध पीएमएलए के तहत अनुसूचित अपराधों की श्रेणी में आते हैं।

इस फैसले के बाद ईडी ने पिनाराई विजयन और उनके परिवार के सदस्यों के आवासों पर भी तलाशी अभियान चलाया था, जिससे मामले का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया था। अब हाईकोर्ट के ताजा फैसले और ईडी निदेशक राहुल नवीन की कोच्चि यात्रा के बाद मामले में जांच तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ईडी इस मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है।
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