कोच्चि के ब्रह्मपुरम अपशिष्ट संयंत्र में सुलग रही आग पर केरल में विपक्ष सरकार पर हमलावर है। वहीं आग से उठ रहे धूंए पर काबू पाने में प्रशासन की विफलता को केरल हाईकोर्ट ने भी गंभीरता से लिया है और इसकी स्थिति पर नजर रखने के लिए शुक्रवार को एक समिति गठित की है।
समिति में एर्नाकुलम जिला कलेक्टर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी और केरल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव शामिल हैं। न्यायमूर्ति एस वी भट्टी और न्यायमूर्ति बसंत बालाजी की पीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को इस मुद्दे से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में विस्तार से अदालत को सूचित करने का निर्देश दिया।
साथ ही केरल हाईकोर्ट ने सरकार को ठोस अपशिष्ट उपचार से निपटने के लिए एक कार्य योजना तैयार करने का भी निर्देश दिया। जब मामला उठाया गया, तो अदालत ने धुएं से संबंधित मुद्दों की वर्तमान स्थिति जानने की कोशिश की और कहा कि हवा में प्रदूषण के कारण न्यायाधीशों और अदालत के कर्मचारियों को सिरदर्द का सामना करना पड़ा।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि ब्रह्मपुरम में स्थिति खराब है क्योंकि हवा समुद्र से भूमि क्षेत्र की ओर बह रही थी। उच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया कि वह कोच्चि शहर से कचरे के गैर-आवागमन से उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए कदम उठाए।
स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करे सरकार
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने बुधवार को राज्य सरकार से कोच्चि में ब्रह्मपुरम अपशिष्ट संयंत्र के आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने का आग्रह किया था। साथ ही उन्होंने दावा किया था कि कचरे के टीले की आग से जहरीले धुएं ने लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा की हैं, उसके आसपास के लिए लोगों के लिए रहना मुश्किल हो गया है। सतीशन ने कहा कि क्षेत्र में तत्काल स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया जाना चाहिए और वहां वायु प्रदूषण के स्तर का परीक्षण करने के बाद पर्याप्त उपचार उपाय किए जाने चाहिए।
केरल के परिवहन मंत्री के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया
केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को राज्य के परिवहन मंत्री एंटनी राजू के खिलाफ 1990 में रिपोर्ट किए गए मादक पदार्थों की जब्ती के एक मामले में सबूतों से कथित छेड़छाड़ के खिलाफ एक निचली अदालत में चल रही कार्यवाही को रद्द कर दिया। अदालत ने तकनीकी आधार का हवाला देते हुए कार्यवाही रद्द कर दी। मामला 1990 में रिपोर्ट किए गए एक ड्रग जब्ती मामले में सबूतों की कथित छेड़छाड़ से संबंधित था।