हाथियों के आतंक से परेशान केरल के इडुक्की जिले में कई जगह गुरुवार को रहवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया। रहवासियों ने शहर के कई इलाकों में रास्ता जाम कर दिया, जिससे काफी लंबा ट्रैफिक लग गया। विरोध हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें कोर्ट ने अरिकोंबन पर फैसला लेने की बजाए 5 सदस्यीय टीम का गठन किया है।
कोर्ट के इस फैसले से नाराजगी
पांच सदस्यीय टीम को 5 अप्रैल तक अदालत को अपना फैसला बताना है। लेकिन तब तक के लिए हाथी को पकड़ने पर कोर्ट ने स्टे लगा दिया है। कोर्ट ने कहा कि हाथी को शांत करने और रेडियो कॉलर तब ही लगाया जाए, जब वह जंगल और वन कर्मियों के रोकने के बावजूद भी रिहाइशी इलाकों में घुस जाए।
बच्चों को स्कूल जाने में भी डर
हाईकोर्ट के इसी फैसला का विरोध करते हुए इडुक्की की कई पंचायतों के लोग सड़कों पर उतर गए। उन्होंने सड़कें भी जाम कर दीं। जिससे कई इलाकों में ट्रैफिक भी जाम हो गया। प्रदर्शनकारियों सहित महिलाओं और बच्चों ने इलाके से हाथी को हटाने की मांग की है। बच्चों का कहना है कि हाथी के कारण हम न स्कूल जा पाते हैं, न ही खेलने जा पाते हैं। उन्हें डर है कि कहीं हाथी स्कूल बस पर भी हमला न कर दे। लोगों का कहना है कि अरिकोंबन के अलावा कुछ और हाथी हैं, जो इलाके में उत्पात मचाते हैं।
वन मंत्री बोले- कानूनी कदम उठाएंगे
केरल के वन मंत्री एके ससींद्रन ने कहा कि अदालत के आदेशों के कारण मामला और कठिन हो गया है। सरकार वहां रहने वाले लोगों की परेशानी विशेषज्ञ समिति के सामने रखेगी और उन्हें क्षेत्र का दौरा करने के लिए मनाने का प्रयास करेगी। हालांकि, ससींद्रन ने कहा कि कोर्ट के फैसले के बाद ही हम अपील कर पाएंगे। मंत्री ने कहा कि कानून के तहत जो भी कदम उठाने होंगे सरकार उठाएगी।
जनहित याचिका पर कोर्ट ने सुनाया था आदेश
स्थानीय निवासियों ने इस बारे में निराशा व्यक्त की और कहा कि वे हाथी को वहां से हटाए जाने तक विरोध प्रदर्शन करेंगे। लोगों ने हाथी के हितों की वकालत करने वालों को यहां आने और स्थानीय निवासियों की दुर्दशा को समझने के लिए अपने परिवारों के साथ रात बिताने के लिए कहा है। अदालत ने पिछले हफ्ते 29 मार्च तक अरिकोंबन को शांत करने और पकड़ने के राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दी थी। अदालत ने पीपुल फॉर एनिमल्स (पीएफए), त्रिवेंद्रम चैप्टर और वॉकिंग आई फाउंडेशन फॉर एनिमल एडवोकेसी द्वारा दायर जनहित याचिका फैसला सुनाया था। याचिकाकर्ता संगठनों ने अपनी याचिका में दावा किया है कि हाथी को बेहोश करने और पकड़ने का आदेश "अवैध और अवैज्ञानिक" था।