केरल उच्च न्यायालय ने गोवा के राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लई के खिलाफ 2018 में सबरीमाला में भगवान अयप्पा मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ उनके भाषण में कुछ टिप्पणियों के लिए दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया है।
'आईपीसी की धारा के तहत नहीं बनता है अपराध'
न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन ने कहा कि आईपीसी की धारा 505(1)(बी) के तहत अपराध नहीं बनता है क्योंकि उन्होंने युवा मोर्चा की राज्य समिति की बैठक में भाषण दिया था, न कि किसी सार्वजनिक सभा में। धारा 505(1)(बी) में प्रावधान है कि जो कोई भी व्यक्ति 'जनता या जनता के किसी वर्ग में भय या चिंता पैदा करने के इरादे से या जिससे किसी व्यक्ति को राज्य या सार्वजनिक शांति के खिलाफ अपराध करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है' ऐसा बयान देता है, तो उसे तीन साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।
राज्यपाल के कार्यकाल के दौरान नहीं शुरू होगी आपराधिक कार्यवाही
इसके अलावा, पिल्लई वर्तमान में गोवा के राज्यपाल हैं। संविधान के अनुच्छेद 361(2) के अनुसार, 'राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल के खिलाफ उनके कार्यकाल के दौरान किसी भी न्यायालय में कोई भी आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जाएगी या जारी नहीं रखी जाएगी।
क्या था बयान, किसने दर्ज कराया एफआईआर?
दरअसल पीएस श्रीधरन पिल्लई ने अपने भाषण में सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने वाले सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की भी आलोचना की थी। उच्च न्यायालय ने कहा कि 'किसी निर्णय की निष्पक्ष और उचित आलोचना, जो एक सार्वजनिक दस्तावेज है, अवमानना नहीं मानी जाएगी या आपराधिक अपराध को आकर्षित नहीं करेगी'। इस मामले में भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष पिल्लई के खिलाफ एक पत्रकार की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसने आरोप लगाया था कि 4 नवंबर, 2018 को अपने भाषण में पीएस श्रीधरन पिल्लई ने कहा था कि 'युवती (किशोरावस्था की महिलाओं) के प्रवेश की स्थिति में 'थंथरी' (मुख्य पुजारी) की तरफ से 'सबरीमाला नाडा' (मंदिर के दरवाजे) को बंद करना अदालत की अवमानना नहीं माना जाएगा'।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिया तर्क
अभियोजन पक्ष ने अदालत से मामले की जांच में हस्तक्षेप न करने का आग्रह किया था क्योंकि जांच अभी भी चल रही थी। इसने अदालत के समक्ष यह भी तर्क दिया था कि पिल्लई की तरफ से अपने भाषण में दिए गए बयान जनता के लिए खतरनाक थे और व्यक्तियों को राज्य या सार्वजनिक शांति के खिलाफ अपराध करने के लिए प्रेरित कर सकते थे। अभियोजन पक्ष से असहमत होते हुए, अदालत ने यह भी कहा कि केवल इसलिए कि पिल्लई की तरफ से एक होटल में दिया गया भाषण समाचार चैनलों और मीडिया की तरफ से प्रकाशित किया गया था, याचिकाकर्ता को धारा 505 (1) (बी) आईपीसी के तहत दंडनीय अपराधों के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है। अदालत ने कहा, 'मीडिया को खबरें प्रकाशित करने का अधिकार है और इसलिए उन्हें भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि पीएस श्रीधरन पिल्लई ने अपने भाषण में ऐसे बयान दिए 'जो दर्शाते हैं कि हिंदुओं के हितों की रक्षा के लिए सभी समुदायों को एकजुट करने का प्रयास किया जा रहा है।