स्वास्थ्य विभाग ने एक विज्ञप्ति में कहा, पहले चरण में, अज्ञात शवों से डीएनए सैंपल एकत्र किए जा रहे हैं। जिंदा बचे लोगों और रिश्तेदारों के सैंपलों की तुलना अज्ञात शवों से एकत्र किए गए सैंपलों से की जाएगी। जिंदा बचे लोगों और रिश्तेदारों को परामर्श देने के बाद उनके सैंपल एकत्र किए जा रहे हैं।
वायनाड जिले के मुंडक्कई क्षेत्र में हुए भूस्खलन में लापता लोगों की पहचान के लिए अब केरल सरकार डीएनए जांच का सहारा लेगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिंदा बचे लोगों और रिश्तेदारों के खून के सैंपल एकत्र करना शुरू कर दिया है। वहीं, नागरिक आपूर्ति विभाग ने लापता लोगों की पहचान करने के लिए राशन कार्ड, आधार नंबर और लिंक किए गए फोन नंबरों का विवरण एकत्र करना शुरू कर दिया है।
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बता दें कि डीएनए जांच के लिए उन शवों और शरीर के हिस्सों की पहचान करने के लिए रक्त संबंधियों के नमूने एकत्र किए जाते हैं, जिनकी अभी तक पहचान नहीं की गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने एक विज्ञप्ति में कहा, पहले चरण में, अज्ञात शवों से डीएनए सैंपल एकत्र किए जा रहे हैं। जिंदा बचे लोगों और रिश्तेदारों के सैंपलों की तुलना अज्ञात शवों से एकत्र किए गए सैंपलों से की जाएगी। जिंदा बचे लोगों और रिश्तेदारों को परामर्श देने के बाद उनके सैंपल एकत्र किए जा रहे हैं। वहीं, नागरिक आपूर्ति विभाग ने लापता व्यक्तियों की पहचान करने के लिए पंचायत अधिकारियों को विवरण दे दिया है।
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राज्य के राजस्व मंत्री के राजन के अनुसार, अब तक 221 शव और 166 शरीर के अंग बरामद किए गए हैं। लापता व्यक्तियों की संख्या 206 से कम होकर 180 हो गई है, क्योंकि अधिकारी उनमें से कुछ से फोन पर संपर्क करने में सक्षम हो गए हैं। उन्होंने कहा कि वायनाड, मलप्पुरम और कोझिकोड से होकर बहने वाली चालियार नदी पर भी छठे दिन तलाशी अभियान जारी रहा।
वायनाड भूस्खलन में मारे गए लोगों के शव इसके तटों पर बहकर आने के बाद यह नदी विनाश का भयावह प्रतीक बन गई है। अधिकारियों ने कहा कि चलियार नदी में पाए गए शवों की कुल संख्या 75 है और शरीर के अंग 142 हैं। शव और शरीर के अंग मिलाकर इनकी कुल संख्या 217 है।