केरल सरकार ने लंबित विधेयकों को मंजूरी न देने को लेकर केरल के राज्यपाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सोमवार को सुनवाई के दौरान केरल सरकार ने याचिका वापस लेने का अनुरोध किया। इसका अटार्नी जनरल आर वेंकटरमणसी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विरोध किया।
लंबित विधेयकों के मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में राज्यपाल के खिलाफ दायर याचिकाओं को केरल सरकार ने वापस लेने का अनुरोध किया। इसका केंद्र ने विरोध किया। लंबी बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई 25 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।
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केरल सरकार ने लंबित विधेयकों को मंजूरी न देने को लेकर केरल के राज्यपाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सोमवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति एएस चंदुरकर की पीठ के सामने केरल सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने याचिका वापस लेने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के राज्यपाल मामले में हाल ही में पारित निर्णय के मद्देनजर यह मुद्दा निरर्थक हो गया है।
इसका अटार्नी जनरल आर वेंकटरमणसी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विरोध किया। उन्होंने कोर्ट से मांग की कि विधेयकों को मंजूरी देने के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को भेजे गए संदर्भ पर शीर्ष न्यायालय के फैसले का इंतजार किया जाए। मेहता ने कहा कि केरल सरकार की याचिका को भी राष्ट्रपति के संदर्भ के साथ संलग्न किया जा सकता है।
इस पर केरल सरकार के वकील वेणुगोपाल ने कहा कि उनकी याचिका का विरोध कैसे किया जा सकता है? राज्य सरकार के याचिका वापस लेने में क्यों हिचकिचाहट हो रही है? इसके पीछे कोई तर्क तो होगा। इसका मतलब तो यही है कि दोनों पक्ष पैसे वसूलेंगे। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि हम यह स्पष्ट कर देंगे कि मामले को वापस लेने पर कोई आपत्ति नहीं हो सकती। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई को तय की गई।
इससे पहले 22 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह इस बात की जांच करेगी कि क्या तमिलनाडु की याचिका पर हाल ही में दिए गए फैसले में केरल सरकार ने अपनी याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों को शामिल किया गया है? तमिलनाडु सरकार की याचिका पर कार्रवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय की एक पीठ ने आठ अप्रैल को राष्ट्रपति के विचार के लिए 10 विधेयकों को आरक्षित करने के फैसले को अवैध और कानून की दृष्टि से त्रुटिपूर्ण करार देते हुए खारिज कर दिया था।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 26 जुलाई को केरल की उस याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई थी। जिसमें विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी नहीं देने का आरोप लगाया गया था। केरल सरकार ने आरोप लगाया कि तत्कालीन राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कुछ विधेयक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे थे और उन्हें अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। याचिकाओं पर संज्ञान लेते हुए शीर्ष अदालत ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और केरल के राज्यपाल के सचिवों को नोटिस जारी किए थे।