राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत
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केरल के विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्ति पर राज्यपाल और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सरकार के बीच अंसतोष जारी है। विवाद उस समय और बढ़ गया, जब राज्यपाल ने साफ कहा कि, वह राज्य सरकार को विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्त करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता है। इसी बीच शनिवार देर रात केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की।
राज्यपाल कार्यालय की तरफ से जारी बयान में कहा, खान ने रात करीब आठ बजे भागवत के साथ एक संक्षिप्त बैठक की। यह बैठक एक आरएसएस नेता के घर पर हुई। यह एक शिष्टाचार मुलाकात थी और पहले से ही तय थी।
विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच बढ़ते मतभेदों को दूर करने के लिए केंद्र एवं भाजपा से हस्तक्षेप करने की मांग की है। जिसके बाद भाजपा ने कहा कि राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान संवैधानिक मूल्यों को बरकरार रखकर अपने कर्तव्य का पालन कर रहे हैं और उन्हें चुप कराने की कोशिश का कोई लाभ नहीं होगा।
राज्यपाल ने शनिवार सुबह मीडिया से मुलाकात की और माकपा सरकार पर आरोप लगाया कि उसने 2019 में कांग्रेस के दौरान कन्नूर विश्वविद्यालय में उन पर हमले की कथित कोशिश के संबंध में पुलिस को मामला दर्ज करने से रोका।
इसके बाद, माकपा की राज्य इकाई के सचिव एम वी गोविंदन ने इन आरोपों का खंडन करने के लिए तिरुवनंतपुमर के एकेजी सेंटर में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह प्रदर्शन अचानक हुआ था और इसके पीछे कोई षड्यंत्र नहीं था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वामपंथी नेता ने आरोप लगाया कि खान का आचरण राज्यपाल के पद के अनुकूल नहीं था। वहीं, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने शुक्रवार को राज्य के विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों में कथित भाई-भतीजावाद पर टिप्पणी के लिए खान को आड़े हाथ लिया था और उनके बयान को बेतुका बताया था।