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केरल : राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने सरकार पर साधा निशाना, कहा- राजभवन को नियंत्रित करने का उसके पास कोई अधिकार नहीं

Sat, 19 Feb 2022 07:39 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क अमर उजाला, तिरुवनन्तपुरम

सार

शनिवार को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने सार्वजिक रूप से एलडीएफ सरकार की आलोचना की। इस दौरान उन्होंने कहा कि राजभवन को नियंत्रित करने का अधिकार किसी को भी नहीं है।
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केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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विस्तार
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केरल में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और वाम मोर्चे की सरकार के बीच चल रही तनातनी थमती नहीं दिख रही है। दोनों के बीच चल रहे विवाद ने शनिवार को एक नया मोड़ ले लिया। शनिवार को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने सार्वजिक रूप से एलडीएफ सरकार की आलोचना की। इस दौरान उन्होंने कहा कि राजभवन को नियंत्रित करने का अधिकार किसी को भी नहीं है। राज्यपाल ने कहा, मैं यहां प्रशासन चलाने के लिए नहीं हूं। मैं यहां यह सुनिश्चित करने के लिए हूं कि सरकार का कामकाज संविधान के प्रावधानों और संवैधानिक नैतिकता के अनुसार हो।

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उन्होंने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि सरकार के मंत्री केरल के लोगो के पैसे का गुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा हर दो साल के बाद दूसरे लोगों को पेंशन की गारंटी देने के लिए कर्मचारियों को बदलना गलत है. यह अधिकार का दुरुपयोग है। उन्होंने कहा कि जब यह मामला उनके संज्ञान में आया तो उन्होंने सरकार से इसे खत्म करने के बारे में कहा था। जब तक यह खत्म नहीं हो जाता तब तक वह इस मामले में अपने प्रयास जारी रखेंगे।

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खान ने बताया कि जब वह केंद्रीय कैबिनेट मंत्री थे तब उनके केवल 11 निजी कर्मचारी थे, लेकिन केरल में प्रत्येक मंत्री के पास 20 से अधिक व्यक्तिगत कर्मचारी होते हैं, जिससे राज्य के खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता है। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि निजी कर्मचारियों की नियुक्ति के नाम पर पार्टी कार्यकर्ताओं की भर्ती की जा रही है।
गौरतलब है कि केरल सरकार की नीति के अनुसार, राज्य के मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के निजी कर्मचारियों को वैधानिक पेंशन मिलती है। इसमें ढाई साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को शामिल किया जाता है।

उन्होंने विपक्ष के नेता वी डी सतीसन और माकपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एके बालन को लताड़ लगाते हुए कहा कि कांग्रेस नेता सतीसन को अपने वरिष्ठ नेताओं ओमन चांडी और रमेश चेन्नीथला से सीखना चाहिए। शुक्रवार को केरल विधानसभा में हुए हंगामे को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार को सलाह देना उनका संवैधानिक कर्तव्य था। यह सरकार पर निर्भर करता है कि वे इसे कैसे लेते हैं। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा में सरकार की सहमति को रोककर सरकार का नीतिगत भाषण दिया था। हालांकि, नीतिगत संबोधन में उन्होंने शुक्रवार को वाम मोर्चा सरकार की प्रशासनिक उपलब्धियों को रेखांकित भी किया था।

 इस बीच केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन ने ट्वीट कर कहा है कि केरल में सत्तारूढ़ और विपक्षी मोर्चे लगातार केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को बदनाम करने और उनका अपमान करने की कोशिश कर रहे हैं। सीएम को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या यह उनकी अनुमति से है कि ये साइबर गुंडे और अन्य एलडीएफ नेता राज्यपाल का अपमान करने की कोशिश कर रहे हैं।

राज्यपाल के दबाव में सरकार द्वारा वरिष्ठ नौकरशाह केआर ज्योतिलाल को प्रमुख सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के रूप में स्थानांतरित करने को लेकर केरल के राज्यपाल खान ने कहा कि  मैं इस स्थिति को स्वीकार नहीं कर सकता। सरकार में किसी को भी राजभवन को नियंत्रित करने का अधिकार नहीं है और अगर उन्होंने ऐसा करने की कोशिश की तो इससे "संवैधानिक संकट पैदा हो जाएगा। दरअसल, ज्योतिलाल ने कुछ दिन पहले सरकार की ओर से राजभवन को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने पूर्व भाजपा नेता हरि एस कार्थी की राज्यपाल के अतिरिक्त निजी सहायक के रूप में नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे।
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गुरुवार को केरल विधानसभा सत्र की पूर्व संध्या आरिफ मोहम्मद खान ने सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार के नीति दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।

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