केरल में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और राज्य सरकार के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। खान ने आज आरोप लगाया कि उन पर कन्नूर में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हमला हुआ। उधर, केरल सरकार ने कहा है कि राज्यपाल सिर्फ कुछ समय के लिए विधेयकों को रोक सकते हैं, अनिश्चितकाल के लिए नहीं।
राज्यपाल ने कहा कि कन्नूर में मुझ पर हमले के वीडियो में आप एक वरिष्ठ नेता (सीएम विजयन) को देख सकते हैं, जो अब मुख्यमंत्री कार्यालय में है। यही नेता पुलिस को कार्रवाई करने से रोक रहे थे।
राज्यपाल ने आज राजभवन के सभागार में अप्रत्याशित रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस की और 2019 में कन्नूर विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में कथित तौर पर उनके साथ हुई मारपीट के वीडियो साझा किए। दो बड़ी स्क्रीन पर उन्होंने घटना के वीडियो साझा करते हुए कहा कि इसमें एक वरिष्ठ अधिकारी को पुलिस को कर्तव्य के निर्वहन से रोकते हुए देखा जा सकता है।
राज्यपाल खान ने कहा कि ऐसे राज्य में जहां लोगों को काली शर्ट पहनने पर गिरफ्तार कर लिया जाता है, ऐसी घटनाएं होती हैं। हालांकि, पुलिस कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की और लोगों को मुझ तक पहुंचने से रोका।
खान ने आरोप लगाया कि कन्नूर विश्वविद्यालय के कुलपति का इस्तेमाल यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि मैं मंच पर मौजूद रहूं, तभी हमला किया जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसकी एफआईआर नहीं करने के निर्देश दिए थे। पुलिस को मामले का संज्ञान नहीं लेने को भी कहा था। यह हमला बड़ा अपराध था। हमलावार मुझे मारना नहीं चाहते थे, सिर्फ मुझे डराना चाहते थे।
उधर, केरल के मंत्री पी. राजीव ने कोच्चि में कहा कि विधानसभा में पारित विधेयक को राज्यपाल बेमुद्दत समय तक नहीं रोक सकते हैं। संविधान में राज्यपाल को विधेयक को मंजूरी देने, रोकने या राष्ट्रपति के पास भेजने का अधिकार है। उन्हें विधेयक खारिज करने का अधिकार नहीं है।
संघ प्रमुख से मिले थे राज्यपाल
इससे पूर्व केरल के राज्यपाल खान ने शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात की थी। राज्यपाल ने इसके बारे में मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया।
सीएम विजयन पर लगाए गंभीर आरोप
पिछले महीने राज्यपाल ने सीएम पिनराई विजयन और कन्नूर विश्वविद्यालय के कुलपति पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि वह मुझे शारीरिक रूप से चोट पहुंचाने की साजिश में शामिल थे। साथ ही कुलपति पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वह एक अपराधी हैं, वह राजनीतिक कारणों से कुलपति बने बैठे हैं। मुझे कुलपति ने वहां आमंत्रित किया था। जब मुझ पर हमला किया गया तो उनका कर्तव्य क्या था कि उनको पुलिस में सूचना नहीं देनी चाहिए थीे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वामपंथी नेता एम वी गोविंदन ने आरोप लगाया कि खान का आचरण राज्यपाल के पद के अनुकूल नहीं था। वहीं, मुख्यमंत्री विजयन ने राज्य के विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों में कथित भाई-भतीजावाद पर टिप्पणी के लिए खान को आड़े हाथ लिया था और उनके बयान को बेतुका बताया था।