केरल में ड्रग्स का नेटवर्क अब एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। यह राज्य न केवल नशीले पदार्थों का ट्रांजिट प्वाइंट बन चुका है, बल्कि यहां उपभोक्ताओं की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है। जांच एजेंसियों के निशाने पर अब सिर्फ सप्लायर और कैरियर ही नहीं, बल्कि उपभोक्ता भी हैं। हाल के महीनों में लग्जरी होटलों में आयोजित हाई-प्रोफाइल पार्टियां जांच के दायरे में आई हैं। इन पार्टियों में महंगे और सिंथेटिक ड्रग्स जैसे MDMA और एक्स्टेसी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
गांजा से हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स की ओर झुकाव
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पहले जहां गांजा (मारिजुआना) की मांग अधिक थी, वहीं अब इसकी जगह हेरोइन, MDMA और एक्स्टेसी ने ले ली है। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि गांजा की पहचान करना अपेक्षाकृत आसान होता है, जबकि हेरोइन को छिपाना ज्यादा आसान है।
प्रवासी मजदूर बन रहे हैं ड्रग्स के कैरियर
जांच में यह बात सामने आई है कि ड्रग तस्कर अब प्रवासी मजदूरों का इस्तेमाल कैरियर के रूप में कर रहे हैं। इन्हें नौकरी का लालच देकर या डराकर इस अवैध कारोबार में धकेला जा रहा है। जो मजदूर इस काम से इनकार करते हैं, उन्हें अपने राज्य या देश वापस भेजने की धमकी दी जाती है। पिछले डेढ़ साल में करीब 103 प्रवासी मजदूर इस मामले में पकड़े जा चुके हैं, जिनमें अधिकतर असम और पूर्वोत्तर राज्यों से हैं।
रेलवे स्टेशनों पर नया तरीका
तस्करी का एक नया तरीका भी सामने आया है। प्रवासी मजदूर रेलवे स्टेशन पर बैग में ड्रग्स छोड़ देते हैं और बाद में संपर्क कर उसे उठवा लिया जाता है। इससे वे खुद पकड़े जाने से बच जाते हैं।
लग्जरी पार्टियों में ड्रग्स का खेल
केरल पुलिस अब उन हाई-प्रोफाइल लोगों के नेटवर्क की जांच कर रही है, जो लग्जरी होटलों में आयोजित पार्टियों के जरिए ड्रग्स सप्लाई करते हैं। ये पार्टियां दिखने में निजी समारोह होती हैं, लेकिन असल में ड्रग्स नेटवर्किंग का अड्डा बन चुकी हैं। हाल ही में एक कार्रवाई के दौरान 183.55 ग्राम MDMA और 93.51 ग्राम एक्स्टेसी बरामद की गई। इसके बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया।
अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
जांच में यह भी पता चला है कि केरल में ड्रग्स की सप्लाई कर्नाटक और दिल्ली जैसे राज्यों से हो रही है। साथ ही, राज्य की 590 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा इसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों के लिए आसान प्रवेश द्वार बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘गोल्डन क्रेसेंट’ और ‘गोल्डन ट्रायंगल’ जैसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क भी केरल में सक्रिय हैं।
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