केरल के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद काफी तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। मृतक के परिजनों के साथ अन्य छात्राओं ने मामले की कड़ी जांच की मांग की थी। इसके बाद केरल सरकार ने बुधवार को मामले में हस्तक्षेप किया और छात्रा की मौत की अपराध शाखा से जांच कराने का आदेश दिया।
केरल की उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदू और सहकारिता और पंजीकरण मंत्री वी एन वासवन ने कॉलेज के छात्र- छात्राओं, संस्था के प्रबंधन और अभिभावक शिक्षक संघ (पीटीए) के साथ मुलाकात के बाद अपराध शाखा की जांच का निर्णय लिया। बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री बिंदू ने कहा कि कई फैसले लिए गए हैं और उनमें से प्राथमिक छात्र की मौत की अपराध शाखा द्वारा जांच है।
छात्रा की मौत ने अन्य पढ़ने वाले उसके सहपाठियों को झकझोर कर रख दिया है साथ ही सहपाठियों कॉलेज प्रशासन पर उसे आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया। मृत छात्रा के सहपाठियों और परिजनों ने कॉलेज के प्राचार्य और शिक्षकों पर भावनात्मक प्रताड़ना का आरोप लगाया है जिसके कारण श्रद्धा को अपनी जान लेने पर मजबूर होना पड़ा।
केरल सरकार में मंत्री बिंदु ने कहा कि कोई भी कार्रवाई अपराध शाखा की जांच के परिणाम के अधीन होगी। पीड़ित परिवार ने क्राइम ब्रांच की जांच का स्वागत किया है। वहीं, परिवार ने कहा कि अगर जांच ठीक से नहीं हुई तो वे उचित जांच की मांग को लेकर अदालत का रुख करेंगे।
मंत्री ने कहा कि बैठक में निर्णय लिया गया कि विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले छात्रों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। परामर्श और छात्र शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत किया जाएग और प्रबंधन एक निर्वाचित छात्र संघ बनाने पर विचार करेगा।
आगे मंत्री ने कहा कि लड़कियों के छात्रावास की मुख्य वार्डन को हटाने की छात्रों की मांग के संबंध में, प्रबंधन ने अपने वरिष्ठों, विशेष रूप से बिशप के साथ चर्चा करने के लिए समय मांगा है, क्योंकि वह एक नन है। साथ मंत्री वासवान ने कहा कि इन फैसलों के मद्देनजर छात्र अपना विरोध वापस लेने पर सहमत हो गए हैं और कॉलेज के 12 जून से फिर से खुलने की उम्मीद है।