आदिवासी व्यक्ति को पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में केरल की एक कोर्ट ने 13 लोगों को सात साल के जेल की सजा सुनाई है। 22 मार्च 2018 को अट्टापडी के एक आदिवासी व्यक्ति मधु को चोरी के आरोप में स्थानीय लोगों ने पकड़ा था। गांववालों ने उसे पहले तो बांधा फिर पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी। सजा सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि सभ्य समाज में मोरल पुलिसिंग को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता है।
मामले में करीब साढ़े पांच साल बाद, विशेष अदालत के जस्टिस केएम रतीश कुमार ने उन्हें धारा 304 भाग II के तहत सात साल के जेल की सजा सुनाई है। घटना की निंदा करते हुए अदालत ने कहा कि तमाम सबूतों से स्पष्ट होता है कि आरोपी व्यक्तियों ने नैतिक पुलिस की भूमिका निभाई है। सभ्य समाज में इस तरह की पुलिसिंग को सहन नहीं किया जा सकता। नैतिक पुलिसिंग के मामलों में सजा देना जरूरी है, नहीं तो ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। कोर्ट ने उन्हें अधिकतम सजा इसलिए नहीं दी, क्योंकि उनमें से एक ने मधू को केला दिया था तो एक ने जूस पिलाया था। अदालत ने कहा कि हर संत का एक अतीत होता है और हर पापी का एक भविष्य होता है।
सजा काफी नहीं है
विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) राजेश एम मेनन ने कहा कि आरोपियों को जो सजा मिली है, वह काफी नहीं है। वे आजीवन कारावास के हकदार थे। मेमन ने बताया कि 16 में से एक आरोपी को पहले ही 304 (2) के तहत पहले ही दोषी ठहराया गया था। बाकी 12 आरोपियों को अतिरिक्त रूप से धारा 326 और 367 के तहत दोषी ठहराया गया है। एसपीपी के अनुसार 12 दोषियों को एससी/एसटी एक्ट के धारा 3(1) (डी) के तहत भी दोषी ठहराया गया है, जिन्हें सात साल के कारावास की सजा सुनाई गई है। मामले के 16वें आरोपी को धारा 352 के तहत दोषी ठहराया गया था। एसपीपी ने कहा कि 16 व्यक्तियों में से दो आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया था।
परिवार भी सजा से नाराज
मधु के परिवार ने सजा पर नाराजगी जताई है। मां ने कहा कि सजा पर्याप्त नहीं है। बहन ने भी कहा कि हम सजा से संतुष्ट नहीं हैं। अदालत शायद यह नहीं समझ पाई कि वास्तव में क्या हुआ था, उसे कैसे पीटा गया और जंगल से बाहर लाया गया। अगर हमें न्याय नहीं मिला तो हमें हाईकोर्ट जाना पड़ेगा। हम सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए भी तैयार हैं।
यह था चोरी का आरोप
पुलिस ने बताया कि मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, मधु के सिर पर चोट के निशान थे और पसलियां टूटने समेत पूरे शरीर पर चोट के निशान थे, साथ ही आंतरिक रक्तस्राव भी हुआ था। उसके परिवार ने कहा था कि मधु मानसिक रूप से अस्वस्थ है। वह पिछले कई महीनों से जंगल में एक गुफा में रह रहा था। उनकी मां और बहन ने बताया कि लगभग 10-15 लोगों का एक समूह जंगल में गया था और पलक्कड़ जिले के वन-किनारे अगाली शहर में कुछ दुकानों से खाद्य सामग्री चोरी करने के आरोप में उनकी पिटाई की थी।