केरल में कांग्रेस ने रविवार को शशि थरूर द्वारा केंद्र सरकार के आमंत्रण पर बहु-दलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के फैसले के बाद पैदा हुए विवाद से खुद को अलग कर लिया। पार्टी ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर टिप्पणी करना पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का विषय है।
कांग्रेस सांसद के रूप में अपनी "मुख्य जिम्मेदारी" निभाने की अपील
विपक्ष के नेता वीडी सतीसन ने एक पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा कि शशि थरूर कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य हैं और उनके जैसे नेता पार्टी अनुक्रम में उनसे ऊपर हैं। एक सीडब्ल्यूसी सदस्य का पद काफी अहम होता है। इस विषय पर पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व अपनी राय देगा, और हम वही राय साझा करेंगे। हालांकि, वरिष्ठ कांग्रेस नेता तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने थरूर से कांग्रेस सांसद के रूप में अपनी "मुख्य जिम्मेदारी" निभाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि पूर्व संयुक्त राष्ट्र राजनयिक अंतरराष्ट्रीय अवसरों की तलाश कर सकते हैं, लेकिन ऐसा पार्टी नेतृत्व की अनुमति से ही होना चाहिए। एक टीवी चैनल से बात करते हुए राधाकृष्णन ने कहा, थरूर की दो भूमिकाएं हैं—एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके विचारों और संबंधों की वजह से, और दूसरी कांग्रेस सांसद के रूप में।
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'संसदीय कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए'
उन्होंने आगे कहा, स्वाभाविक है कि उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की जानकारी और मंजूरी के साथ ही आगे बढ़ना चाहिए। वह अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में काम कर सकते हैं, लेकिन वह पार्टी को कमजोर नहीं कर सकते, जिसका वे वर्तमान में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। राधाकृष्णन ने कहा कि उन्हें पहले अपने संसदीय कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि थरूर कांग्रेस नेतृत्व की स्वीकृति से अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में अवसर तलाश सकते हैं।़
इस वजह से शुरू हुआ विवाद
आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ भारत का रुख सामने रखने के लिए विदेश भेजे जाने वाले एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के केंद्र के निमंत्रण को थरूर ने स्वीकार कर लिया है, जिसके मद्देनजर कांग्रेस नेताओं ने ये प्रतिक्रियाएं दी हैं। शशि थरूर के फैसले पर इसलिए विवाद पैदा हुआ है कि केंद्र सरकार के अनुरोध पर कांग्रेस की ओर से दिए गए नामों में उनका नाम नहीं था। थरूर ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें इस मामले में कोई राजनीति नहीं दिखती।
कांग्रेस ने सौंपे थे ये नाम
उन्होंने कहा कि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विदेश मामलों में उनके पिछले अनुभव को देखते हुए उन्हें प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया और उन्होंने तुरंत सहमति दे दी। सरकार की ओर से प्रतिनिधिमंडल के लिए चार सांसदों के नाम मांगे जाने के बाद, कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, लोकसभा में पार्टी के उपनेता गौरव गोगोई, राज्यसभा सदस्य सैयद नासिर हुसैन और लोकसभा सदस्य राजा बरार के नाम दिए थे।