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Kerala: मुख्यमंत्री विजयन ने माकपा कार्यकर्ता को लगाई फटकार, कहा सार्वजनिक कार्यक्रम में शिष्टाचार जरूरी

Tue, 24 Mar 2026 01:35 PM IST
Sandhya Kumari न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

केरल सीएम पिनाराई विजयन ने सार्वजनिक कार्यक्रम में कार्यकर्ता को फटकार को सही ठहराया। कार्यकर्ता ने गलती मानी। विपक्ष ने आलोचना की, जबकि सीएम ने शिष्टाचार बनाए रखने पर जोर दिया।

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Pinarayi Vijayan - फोटो : ANI
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विस्तार
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केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अपनी पार्टी (माकपा) के कार्यकर्ता को फटकार लगाने को उचित ठहराया। उन्होंने कहा, सामान्य शिष्टाचार का पालन न होने पर ऐसी प्रतिक्रियाएं आएंगी। मुख्यमंत्री ने कोन्नी में अपनी पार्टी के कार्यकर्ता दास पी जॉर्ज से कहा था, ‘जाओ और घर पर पूछो।’

मुख्यमंत्री ने इडुक्की में पत्रकारों से बात करते हुए यह प्रतिक्रिया दी। उन्होंने समझाया, सार्वजनिक कार्यक्रम प्रेस कॉन्फ्रेंस से अलग होता है। विजयन ने कहा, ऐसे आयोजनों के बीच सवाल पूछने की अनुमति नहीं होती है। यह सार्वजनिक शिष्टाचार के विरुद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया, उनका मतलब यह नहीं था कि कोई कार्यक्रम में उनका या एलडीएफ का विरोध करने आया था। मुख्यमंत्री ने कहा, पार्टी कार्यकर्ता कभी-कभी उत्साहित हो जाते हैं। उन्हें कार्यकर्ता की प्रतिक्रिया की जानकारी है। कार्यकर्ता ने भी अपनी गलती स्वीकार की है।

कार्यकर्ता ने मानी अपनी गलती

माकपा कार्यकर्ता दास पी जॉर्ज ने एक टीवी चैनल को बताया कि मुख्यमंत्री के बोलते समय सवाल पूछकर गलती की थी, उन्हें प्रश्न नहीं पूछना चाहिए था। जॉर्ज ने स्पष्ट किया, मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया से उन्हें कोई ठेस नहीं पहुंची। उन्होंने महसूस किया कि मुख्यमंत्री को लगा होगा कि उन्होंने भाषण में बाधा डाली, इसलिए वैसी प्रतिक्रिया मिली। जॉर्ज ने बताया कि वह मुख्यमंत्री से पूछना चाहते थे कि केंद्र द्वारा केआईआईएफबी के लिए धन रोके जाने के बाद सरकार तीसरी बार सत्ता में आने पर विकास कैसे करेगी।

विपक्षी दल ने की आलोचना 

इस बीच, कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने मुख्यमंत्री विजयन की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने कहा, विजयन का बयान दर्शाता है कि मुख्यमंत्री आगामी चुनावों में हार की आशंका से मानसिक संतुलन खो चुके हैं। वेणुगोपाल ने इसे मुख्यमंत्री की हताशा का संकेत बताया। इसके जवाब में मुख्यमंत्री विजयन ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा, यदि वेणुगोपाल सोचते हैं कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में शिष्टाचार बनाए रखने की आवश्यकता नहीं है, तो यह उनका निर्णय है।

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